Greater Noida CCTV project: ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी परियोजना के तहत कैमरे लगाने का काम फिर टला, तीन महीने बाद भी कंपनी का चयन नहीं

Greater Noida CCTV project: ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी परियोजना के तहत कैमरे लगाने का काम फिर टला, तीन महीने बाद भी कंपनी का चयन नहीं
ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और यातायात प्रबंधन को हाईटेक करने के लिए प्रस्तावित सेफ सिटी परियोजना में एक बार फिर देरी की संभावना बढ़ गई है। शहर के प्रमुख स्थानों पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पिछले कई वर्षों से चल रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि कैमरे लगाने के लिए आगे आई तीन कंपनियों द्वारा डेमो दिए जाने के तीन महीने बीत चुके हैं, फिर भी अभी तक अंतिम कंपनी का चयन नहीं हो पाया है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार कैमरे लगाने के लिए कंपनियों ने निविदा में तय राशि से अधिक बोली लगा दी है। इसी कारण चयन प्रक्रिया में देरी हो रही है और अब प्राधिकरण कंपनियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। जब तक इस प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक परियोजना का काम शुरू होना संभव नहीं होगा।
सेफ सिटी परियोजना के तहत ग्रेटर नोएडा में 350 से अधिक प्रमुख स्थानों पर लगभग 2700 अत्याधुनिक कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव है। इस महत्वाकांक्षी योजना की कुल लागत करीब 227.60 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसका उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना, अपराधों पर नजर रखना और यातायात को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है।
कैमरे लगाने की योजना पिछले तीन से चार वर्षों से तैयार की जा रही है। इस दौरान कई बार निविदा की तारीख बढ़ाई गई और अलग-अलग शहरों के मॉडल का अध्ययन भी किया गया। अधिकारियों की टीम ने हैदराबाद, पुडुचेरी, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में लागू सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम का अध्ययन किया, ताकि ग्रेटर नोएडा में भी उसी तरह की आधुनिक व्यवस्था लागू की जा सके।
लंबी प्रक्रिया के बाद पिछले साल तीन प्रमुख कंपनियों—एल एंड टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, एनईसी और रेलटेक—ने अपने-अपने सिस्टम का डेमो प्रस्तुत किया था। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि जल्द ही कंपनी का चयन कर नए साल की शुरुआत में कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि अब तीन महीने बीत जाने के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है, जिससे परियोजना के शुरू होने में और देरी की आशंका बढ़ गई है।
इस परियोजना के तहत परी चौक, एलजी चौक, जगत फार्म, अमृतपुरम समेत शहर के सभी प्रमुख गोलचक्करों, बाजारों और सेक्टरों के प्रवेश द्वारों पर कैमरे लगाए जाने हैं। इसके लिए कई स्थानों को पहले ही चिन्हित किया जा चुका है। इन कैमरों के जरिए शहर में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और अपराध या यातायात से जुड़ी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
योजना के तहत केवल कैमरे ही नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि प्रमुख गोलचक्करों पर मौसम से संबंधित जानकारी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इससे लोगों को ट्रैफिक और मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।
परियोजना के तहत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से शहर में लगे सभी कैमरों की निगरानी 24 घंटे की जाएगी। इसके अलावा अधिकारियों को मोबाइल फोन के जरिए भी शहर की गतिविधियों को देखने की सुविधा दी जाएगी।
भविष्य में इस कंट्रोल रूम को शहर की अन्य मूलभूत सेवाओं से भी जोड़े जाने की योजना है। इसमें पेयजल आपूर्ति और सीवर व्यवस्था जैसी सुविधाओं को भी कंट्रोल रूम से मॉनिटर करने की तैयारी की जा रही है, ताकि शहर के प्रबंधन को और अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाया जा सके।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी अभिषेक पाठक ने बताया कि शहर में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक यातायात प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। तीन प्रमुख कंपनियों द्वारा डेमो भी दिया जा चुका है, लेकिन निविदा राशि से अधिक बोली लगाए जाने के कारण प्रक्रिया में थोड़ा समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी प्रबंधन के साथ बातचीत जारी है और जल्द ही अंतिम कंपनी का चयन कर कैमरे लगाने का काम शुरू कराया जाएगा।
