
KFD Vaccine India: KFD Vaccine: क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के खिलाफ भारत को मिली बड़ी कामयाबी
नई दिल्ली, 8 फरवरी। देश के पश्चिमी घाट क्षेत्र में फैलने वाले खतरनाक संक्रामक रोग क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के खिलाफ भारत को बड़ी वैज्ञानिक सफलता हासिल हुई है। इस बीमारी से बचाव के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने एक उन्नत और स्वदेशी वैक्सीन विकसित की है, जिसका ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। यह वैक्सीन दो खुराक में दी जाएगी और दोनों खुराक के बीच 28 दिन का अंतराल अनिवार्य होगा।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज मुख्य रूप से कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र जैसे पश्चिमी घाट से जुड़े राज्यों में पाई जाती है। यह एक टिक-बोर्न वायरल बीमारी है, जो तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और गंभीर मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है। लंबे समय से इस बीमारी के प्रभावी और सुरक्षित टीके की जरूरत महसूस की जा रही थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत आईसीएमआर ने कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर इस वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया शुरू की थी। इसे इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड और आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने मिलकर विकसित किया है। वैक्सीन से जुड़ी जानवरों पर चैलेंज स्टडी और टॉक्सिसिटी स्टडी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं, जिसके बाद ह्यूमन ट्रायल को हरी झंडी दी गई।
यह वैक्सीन जीएलपी-ग्रेड है और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन से मंजूरी मिलने के बाद पहले चरण का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया गया है। यह पूरी तरह से स्वदेशी, दो खुराक वाली एडज्यूवेंटेड इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है, जिसे 28 दिन के अंतराल पर दिया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि पहला चरण सफल रहता है, तो आगे के चरणों में बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यदि यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी पाई जाती है, तो इसके लिए सीडीएससीओ से अंतिम मंजूरी मांगी जाएगी। इसके बाद पश्चिमी घाट क्षेत्र में रहने वाले लोगों, वन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और जोखिम वाले इलाकों की आबादी को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। यह उपलब्धि न केवल क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के नियंत्रण में मददगार होगी, बल्कि भारत की वैक्सीन रिसर्च और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को भी नई मजबूती देगी।





