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KAM SAMAY ME DIALYSIS: सुचेता कृपलानी अस्पताल बना बड़ा डायलिसिस केंद्र, 11 महीनों में 5922 सत्र पूरे

KAM SAMAY ME DIALYSIS: सुचेता कृपलानी अस्पताल बना बड़ा डायलिसिस केंद्र, 11 महीनों में 5922 सत्र पूरे

नई दिल्ली में किडनी रोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, जहां लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से संबद्ध श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल ने कम समय में डायलिसिस सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने महज 11 महीनों में 5922 डायलिसिस सत्र पूरे कर यह साबित कर दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों तक तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं।

दरअसल, अस्पताल में पहले हीमो डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। किडनी रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 7 अप्रैल 2025 से इस सेवा की शुरुआत की गई। नई सेवा होने के बावजूद अस्पताल ने बिना किसी बड़े प्रचार के हजारों मरीजों का सफल इलाज किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मरीजों का अस्पताल पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है और उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है।

अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनुपम प्रकाश के अनुसार, एंड स्टेज किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों के लिए डायलिसिस जीवन रक्षक उपचार है। नियमित डायलिसिस से न केवल मरीजों की जान बचाई जा रही है, बल्कि उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि क्रोनिक किडनी फेल्योर के मरीजों को सप्ताह में दो या उससे अधिक बार डायलिसिस की आवश्यकता होती है, जबकि संक्रमण, सेप्सिस या गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न जटिलताओं के मामलों में भी यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

अस्पताल प्रशासन ने डायलिसिस यूनिट को और मजबूत बनाने की योजना भी तैयार की है। फिलहाल यहां 20 मशीनें कार्यरत हैं, जबकि क्रिटिकल केयर यूनिट और आईसीयू में भी अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। जल्द ही 6 नई मशीनें जोड़ी जाएंगी, जिससे कुल मशीनों की संख्या बढ़कर 30 हो जाएगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।

विशेष रूप से एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए भी अलग से दो मशीनें आरक्षित की गई हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित और निर्बाध डायलिसिस सुविधा मिल सके। इसके अलावा जिन मरीजों को गुर्दा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन डोनर नहीं मिल पाता, उनके लिए यह सेवा जीवन रेखा का काम कर रही है।

अन्य सरकारी अस्पतालों की बात करें तो कलावती सरन बाल चिकित्सालय में एक वर्ष में 1489 डायलिसिस सत्र किए गए, जबकि सफदरजंग अस्पताल में 9000 और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 10,000 सत्र पूरे किए गए। इससे स्पष्ट है कि सरकारी अस्पतालों में किडनी रोगियों को बड़ी संख्या में निशुल्क डायलिसिस सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हालांकि, डायलिसिस के बढ़ते आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, असंतुलित जीवनशैली और समय पर जांच न कराना प्रमुख कारण हैं। ऐसे में जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो गई है।

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