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Engineer Yuvraj Death Case: एनडीआरएफ ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, नोएडा अथॉरिटी पहुंची एसआईटी

Engineer Yuvraj Death Case: एनडीआरएफ ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, नोएडा अथॉरिटी पहुंची एसआईटी

नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल नोएडा बल्कि प्रदेश की व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंची और पूरे इलाके का बारीकी से मुआयना किया। एनडीआरएफ के जवानों ने उस गड्ढे की स्थिति, उसकी गहराई, पानी की मात्रा और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान से देखा, ताकि यह समझा जा सके कि आखिर किन परिस्थितियों में यह हादसा हुआ और क्या इसे रोका जा सकता था।

एनडीआरएफ की टीम का फोकस यह जानने पर रहा कि निर्माणाधीन साइट पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि खुले और पानी से भरे गड्ढे के आसपास न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी संकेत लगे हुए थे, जिससे वाहन चालक को खतरे का अंदाजा हो सके। हादसे के बाद एनडीआरएफ अपने निरीक्षण की रिपोर्ट संबंधित एजेंसियों को सौंपेगी, जो आगे की जांच में अहम भूमिका निभाएगी।

दूसरी ओर, इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी भी सक्रिय है। गुरुवार शाम एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पहुंची, जहां प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने अपने-अपने जवाब पेश किए। नोएडा प्राधिकरण ने इस मामले में करीब 60 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कंस्ट्रक्शन साइट की स्थिति, अनुमति प्रक्रिया, सुरक्षा इंतजाम और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का ब्योरा दिया गया है। वहीं जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी अलग रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी है। एसआईटी ने करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारियों से पूछताछ कर हर पहलू पर जानकारी ली, हालांकि देर शाम तक रिपोर्ट सौंपे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच का सबसे अहम बिंदु रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई देरी है। जांच टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि युवराज की कार गड्ढे में गिरने के बाद करीब दो घंटे तक प्रभावी बचाव कार्य क्यों शुरू नहीं हो सका। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या जलभराव वाले इस इलाके को पहले से खतरनाक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। यदि ऐसा था, तो वहां समय रहते बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर की लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

जिला प्रशासन की ओर से एसआईटी को सौंपी गई रिपोर्ट में घटना के समय कंट्रोल रूम, फील्ड स्टाफ और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की स्थिति का भी जिक्र किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि मौके पर कौन-कौन सी टीमें कितनी देर में पहुंचीं, आपात स्थिति में कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई और रेस्क्यू के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिलाधिकारी मेधा रूपम भी स्वयं नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की।

इस हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी नई पहल शुरू करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टर-150 सहित अन्य इलाकों में सड़कों के किनारे सीमेंट ब्लॉक और मजबूत बैरिकेडिंग लगाई जाएगी, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, पूरे सेक्टर और अन्य भूखंडों में बने गड्ढों से पानी की निकासी के निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इन कदमों से भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सकेगा, हालांकि युवराज मेहता की मौत ने सिस्टम की बड़ी चूक को उजागर कर दिया है, जिसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।

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