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Yamuna Expressway Accident: यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: जलती बस से बच्चों को फेंक मां ने बचाई जान, खुद धुएं में लापता

Yamuna Expressway Accident: यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: जलती बस से बच्चों को फेंक मां ने बचाई जान, खुद धुएं में लापता

उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के घने कोहरे के बीच हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। आगरा से नोएडा की ओर जा रही बसों और कारों की जबरदस्त टक्कर के बाद लगी आग में कम से कम 13 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 43 लोग घायल हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बीच एक मां का साहस और बलिदान पूरे देश को झकझोर देने वाला है। बस में फंसी पार्वती नाम की महिला ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने दो बच्चों को जलती बस से बाहर धकेल दिया, लेकिन खुद धुएं और आग के बीच लापता हो गई।

हादसा यमुना एक्सप्रेसवे के 127वें मील के पत्थर के पास हुआ, जहां घने कोहरे के कारण एक के बाद एक वाहन आपस में टकराते चले गए। देखते ही देखते आठ बसें और तीन छोटी गाड़ियां हादसे की चपेट में आ गईं। टक्कर के तुरंत बाद कुछ बसों में आग लग गई, जिससे अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग की लपटों और धुएं के कारण कई लोग बसों में ही फंस गए और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

इसी हादसे में पार्वती नाम की 42 वर्षीय महिला भी अपने बच्चों के साथ बस में फंसी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, बस में आग लगते ही पार्वती ने टूटी खिड़की से अपने बच्चों सनी और प्राची को बाहर धकेल दिया और उन्हें जान बचाकर बाहर निकलने के लिए कहा। बच्चों को बाहर फेंकने के बाद पार्वती खुद बस से बाहर नहीं निकल सकी और आग व धुएं के बीच लापता हो गई। हादसे के बाद से उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पार्वती की ननद गुलजारी अस्पतालों और पोस्टमॉर्टम हाउस के चक्कर काट रही है। गुलजारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद पार्वती से उसकी फोन पर बात हुई थी। उस बातचीत में पार्वती ने रोते हुए कहा था कि उसने बच्चों को बस की टूटी खिड़की से बाहर धकेल दिया है। इसके बाद फोन कट गया और फिर पार्वती से कोई संपर्क नहीं हो सका। अब गुलजारी जले हुए शवों के बीच अपनी भाभी को पहचानने की कोशिश कर रही है, लेकिन अधिकतर शव इतने झुलस चुके हैं कि पहचान करना मुश्किल हो गया है।

पुलिस के मुताबिक, आग में झुलसे अधिकतर शवों की पहचान DNA टेस्ट के जरिए की जाएगी। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना सुबह 4:02 बजे पुलिस को मिली थी और महज 6 मिनट में पहला पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल मौके पर पहुंच गया था। हालांकि घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बेहद कम थी, जिससे बचाव कार्य में भारी दिक्कतें आईं। दमकल और राहत टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

अब तक तीन मृतकों की पहचान हो चुकी है, जिनमें प्रयागराज के अखिलेंद्र प्रताप यादव, महाराजगंज के रामपाल और गोंडा के सुल्तान अहमद शामिल हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, जिन शवों की पहचान हो गई है, उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जा रही है। यह हादसा एक बार फिर कोहरे में तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं एक मां के त्याग और साहस की कहानी हर आंख को नम कर रही है।

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