दिल्ली

World Book Fair 2026: वैश्विक साहित्यिक संवाद का सशक्त मंच बना विश्व पुस्तक मेला 2026, फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, यूक्रेन और कतर रहे केंद्र में

World Book Fair 2026: वैश्विक साहित्यिक संवाद का सशक्त मंच बना विश्व पुस्तक मेला 2026, फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, यूक्रेन और कतर रहे केंद्र में

नई दिल्ली, 14 जनवरी: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का पांचवां दिन अंतरराष्ट्रीय साहित्य, कूटनीतिक संवाद और वैश्विक विचार-विमर्श को समर्पित रहा। इंटरनेशनल पवेलियन में आयोजित सत्रों ने यह स्पष्ट किया कि साहित्य आज भी देशों को जोड़ने, इतिहास को समझने और भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस दिन साहित्य, संस्कृति और पुस्तकों के भविष्य पर केंद्रित कई उच्च स्तरीय संवाद हुए, जिनमें फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, यूक्रेन और कतर विशेष रूप से केंद्र में रहे।

भारत में पोलैंड के राजदूत पियोटर स्विटाल्स्की ने साहित्य को अंतर-सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय पहचान का मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड दोनों ही देशों ने इतिहास में विभाजन और संघर्ष का सामना किया है, लेकिन उनकी साहित्यिक परंपराओं ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा। उन्होंने रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन का उल्लेख करते हुए कहा कि टैगोर दोनों देशों के ऐतिहासिक और सामाजिक अनुभवों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के तहत फ्रेंच पवेलियन का उद्घाटन भी आकर्षण का केंद्र रहा। नोत्र-डेम कैथेड्रल की वास्तुकला से प्रेरित और बांस से निर्मित इस पवेलियन ने सतत विकास और सांस्कृतिक नवाचार का संदेश दिया। यहां आयोजित ‘द फ्यूचर ऑफ बुक्स’ सत्र में भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी माथू और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने बदलती पठन आदतों, प्रकाशन जगत के डिजिटल बदलाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने माना कि भविष्य की किताबें तकनीक और परंपरा के संतुलन से आकार लेंगी।

पांचवें दिन मेले में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें त्रिपुरा के राज्यपाल एन. इंद्रसेना रेड्डी, ईयू कमिश्नर ब्रेवेन सिद्धार्थ, न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर, नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और विजय गोयल शामिल रहे। इनकी मौजूदगी ने मेले के वैचारिक स्तर को और ऊंचा किया।

ऑस्ट्रिया और यूक्रेन के सहयोग से आयोजित एक विशेष पैनल चर्चा में संघर्ष, अनिश्चितता और युद्ध के दौर में साहित्य की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श हुआ। ऑस्ट्रियाई लेखक वैलेरी फ्रिट्श और एंड्रियास उंटरवेगर तथा यूक्रेनी लेखक ल्युबोमिर डेरेश ने अपने अनुभव साझा किए। इस सत्र में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक का सम्मान किया गया, जहां साहित्य को जिजीविषा, पुनर्निर्माण और संवाद का माध्यम बताया गया।

कतर की सांस्कृतिक विरासत विशेषज्ञ मोहम्मद अल ब्लोशी ने अपनी प्रस्तुति में भारत और कतर के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों देशों की परंपराएं समुद्री व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए सदियों से जुड़ी रही हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का सत्र युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा। उन्होंने करुणा की शक्ति पर बात करते हुए अपनी आगामी पुस्तक ‘करुणा: द पॉवर ऑफ कम्पेशन’ और आत्मकथा के अनुभव साझा किए। उन्होंने करुणा गुणांक यानी सीक्यू की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानवता के भविष्य के लिए करुणा, बुद्धिमत्ता और भावनाओं से भी अधिक महत्वपूर्ण मानक बन सकती है।

विश्व पुस्तक मेला 2026 का यह दिन साबित करता है कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद, शांति और साझा भविष्य का मजबूत आधार है।

Realme GT 6 भारत में लॉन्च होने की पुष्टि। अपेक्षित स्पेक्स, फीचर्स, और भी बहुत कुछ

Related Articles

Back to top button
top online casinos in Canada best online casino Canada 2026 top rated online casinos Canada online casinos ranked Canada 2026 top 10 casino sites Canadian players