LPG Price Hike | Special Report: दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़े, महिलाओं ने जताई नजराजगी
रिपोर्ट: रवि डालमिया
देशभर में घरेलू रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम लोगों के घर का बजट प्रभावित होने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपये हो गई है, जो इससे पहले 853 रुपये में मिल रहा था।
जानकारी के अनुसार एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के बाद अब उपभोक्ताओं को रसोई गैस के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही महंगाई के कारण आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
रसोई गैस की कीमत बढ़ने से सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। घरेलू खर्चों में पहले से ही बढ़ोतरी हो रही थी और अब गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च और ज्यादा बढ़ गया है। कई परिवारों के लिए महीने का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि घर का पूरा बजट काफी हद तक रसोई के खर्च पर निर्भर करता है। जब गैस सिलेंडर, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान महंगे हो जाते हैं तो घर का खर्च संतुलित रखना काफी मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि पहले जिस पैसे से कुछ बचत हो जाती थी, अब उसी पैसे से गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें खरीदनी पड़ रही हैं।
कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण घर का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। पहले जहां एक सिलेंडर की कीमत कम हुआ करती थी, वहीं अब हर कुछ महीनों में कीमतों में बदलाव हो जाता है। इससे परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है और कई बार जरूरी चीजों को भी टालना पड़ता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। जब ईंधन की कीमत बढ़ती है तो उसका प्रभाव केवल गैस सिलेंडर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे कई अन्य चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल एलपीजी सिलेंडर की नई कीमत लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। बढ़ती महंगाई के बीच गैस सिलेंडर की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए एक और आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।


