उत्तर प्रदेश, नोएडा: कंट्रोल सेंटर से शहर की आपूर्ति व्यवस्था पर ऑनलाइन नजर रखी जाएगी
उत्तर प्रदेश, नोएडा: कंट्रोल सेंटर से शहर की आपूर्ति व्यवस्था पर ऑनलाइन नजर रखी जाएगी

अजीत कुमार
उत्तर प्रदेश, नोएडा।विद्युत निगम की बिजली लाइनें ऑनलाइन होगी। इसके ही बिजली की लाइनों पर ऑनलाइन ही निगरानी रखी जा सकेगी। अगर बिजली लाइन में कहीं कोई फॉल्ट भी हो जाएगा तो ऑनलाइन लाइन ही फॉल्ट का पता लग जाएगा, जिससे आसानी से दुरुस्त भी किया जा सकेगा। इसका पूरा कंट्रोल रूम सेक्टर-58 डीआर सेंटर में बनाया जाएगा। दरअसल, विद्युत निगम की स्काडा योजना के तहत मैन कंट्रोल सेंटर (एमसीसी) बनाया जाएगा। करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इस कंट्रोल रूम को बनाने में एक वर्ष का समय लग जाएगा। इस कंट्रोल रूम को बनाने का टेंडर भी मेरठ मुख्यालय द्वारा किया जाएगा। इसमें बिजली की हाईटेंशन लाइनों को एलईडी स्क्रीन पर ऑनलाइन देखा जा सकेगा। इसमें पूरे जिले का नक्शा होगा। इसमें 11 हजार केवीए और 33 हजार केवीए की लाइन दर्शाई जाएगी। इसके साथ ही बिजली उपकेंद्र भी दर्शाए गए है। इसमें एक बिजली उपकेंद्र से दूसरे बिजली उपकेंद्र तक लाइन कंट्रोल रूम में एलईडी स्क्रीन पर दर्शाई जाएगी। इसके साथ हाईटेंशन लाइन की सप्लाई चालू होने पर दर्शाई गई दोनों लाइनों की लाइट जल जाएगी। इसके साथ ही अगर कोई लाइन बीच में बंद होगी तो उसको भी स्क्रीन पर आसानी से देखा जा सकेगा। इसके साथ ही अगर कोई हाईटेंशन लाइन में लोकल फॉल्ट होता है तो स्क्रीन पर आसानी से देखा जा सकेगा। फिर उस फॉल्ट को आसानी से दुरुस्त किया जा सकेगा। 33 हजार केवीए की लाइन को बिजली उपकेंद्र तक देखा जा सकेग। वहीं 11 हजार केवीए की लाइन को उपभोक्ता के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर तक देखा जा सकेगा। एमसीसी से हाईटेंशन लाइनों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इस व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने में मदद मिलेगी।
स्काडा का ऐसा होगा कंट्रोल रूम
सेक्टर-58 डीआर सेंटर में ही कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इस कंट्रोल रूम में बड़ी-बड़ी एलईडी लगी होगी। जिस पर बिजली का ढ़ांचा दृश्याया जा सकेगा। लाइनों की क्षमता के अनुसार अलग-अलग लाइट जलेंगी। जैसे एचटी लाइनों के लिए हरी बत्ती और एलटी लाइनों के लिए पीली बत्ती जलेगी। इसी तरह उपकेंद्र के क्षमता और ट्रांसफार्मर की क्षमता के अनुसार भी बत्ती जलेगी। इसमें किसी भी लाइन या ट्रांसफार्मर या उपकेंद्र पर सप्लाई बाधित होने पर तुरंत ही एक मैसेज संबंधित क्षेत्र के जेई और एसडीओ को चला जाएगा। इसके साथ ही किस क्षेत्र में कितने समय के लिए बत्ती गुल रही, इसका भी एक डाटा रखा जाएगा।
निगम कर्मचारी नहीं बोल सकेंगे झूठ
बिजली ढांचा ऑनलाइन होने के बाद विद्युत निगम के कर्मचारी उच्चाधिकारियों से झूठ नहीं बोल सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत बिजली सप्लाई में सुधार भी होगा। लगातार लापरवाही मिलने पर संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकेगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति मिल सकेगी।
विद्युत निगम द्वारा उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने के लिए तमाम कार्य किए जा रहे हैं। स्काडा योजना के तहत एमसीसी बनाया जाएगा। इससे बिजली के ढांचे पर ऑनलाइन नजर रखी जा सकेगी और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति में मदद मिलेगी।
-हरीश बंसल, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम।’