Waste To Wealth: कचरे से कमाई, महिला उद्यमी की नई मिसाल

Waste To Wealth: कचरे से कमाई, महिला उद्यमी की नई मिसाल
नई दिल्ली, 2 अगस्त: अनुसूचित जाति की प्रथम पीढ़ी की महिला उद्यमी स्वर्णलता नेथिपुडी ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर और वित्तीय सहयोग मिले तो बेकार समझे जाने वाले संसाधन भी रोजगार, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बन सकते हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वेंचर कैपिटल फंड फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (वीसीएफ-एससी) योजना के तहत वर्ष 2023 में मिली 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता ने उनके उद्यम को नई ऊंचाई प्रदान की है।
इस वित्तीय सहायता के आधार पर स्वर्णलता ने विशाखापत्तनम में अत्याधुनिक रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र की स्थापना की, जहां हर साल बड़ी मात्रा में बेकार टायरों का पुनर्चक्रण किया जा रहा है। यह संयंत्र अब तक लगभग 6,000 मीट्रिक टन क्रम्ब रबर का उत्पादन कर चुका है, जिसका उपयोग सड़क निर्माण, खेल मैदानों, औद्योगिक उत्पादों और अन्य कई क्षेत्रों में किया जाता है।
कंपनी ने अब तक 2 लाख से अधिक बेकार टायरों का सफलतापूर्वक पुनर्चक्रण कर पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इससे न केवल टायरों के खुले में फेंके जाने और जलाए जाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।
इस परियोजना ने रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। कंपनी ने 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है और लगभग 8 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का निर्माण किया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ अनुसूचित जाति समुदाय के अन्य युवाओं और महिलाओं को भी स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में प्रेरणा मिल रही है।
सरकार की वीसीएफ-एससी योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को वित्तीय सहायता देकर उन्हें उद्योग स्थापित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करना है। स्वर्णलता नेथिपुडी की सफलता इस योजना की प्रभावशीलता का उदाहरण बनकर सामने आई है।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को साकार करते हुए यह उद्योग हरित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास का सफल मॉडल बन चुका है। यह पहल देश में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजन और सतत विकास के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रही है।





