Monday, 9 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Lucknow : योगी सरकार का राज्य कर्मचारियों को दीपावली का तोहफा, महंगाई भत्ता 58 से बढ़ाकर 63 प्रतिशत कियाLucknow : सीएम योगी के नेतृत्व में सौर क्रांति की ओर उत्तर प्रदेश, पीएम सूर्य घर योजना में देश में पहले नंबर परAyodhya : देश में श्रीराम के आचरण को जी रहे दो योगी, एक ‘कर्मयोगी’ मोदी और दूसरे सीएम योगी- सी.पी. राधाकृष्णनAyodhya : पुष्पक विमान से उतरे प्रभु श्रीराम, सीएम योगी ने माला पहनाकर किया स्वागतAyodhya : रामभक्तों पर गोली चलाने और संतों का अपमान करने वाले अयोध्या आएं तो माफी मांगकर आएं- मुख्यमंत्रीAyodhya : राम भारत की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना के आधार, दीपोत्सव भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का वैश्विक उत्सव- राज्यपालAyodhya : योगी सरकार में संभव हुआ मां कौशल्या की पहली शोभायात्रा का आयोजनAyodhya : श्रीरामजन्मभूमि मंदिर संपूर्ण हिंदू स्वाभिमान का स्मारक- उपराष्ट्रपति

Mizoram Railway: मिजोरम में रेल लाइन से विकास और समृद्धि की नई राह

जया वर्मा सिन्हा, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय रेलवे बोर्ड

Mizoram Railway: मिजोरम में रेल लाइन से विकास और समृद्धि की नई राह

लेखक: जया वर्मा सिन्हा
पूर्व अध्यक्ष, भारतीय रेलवे बोर्ड

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम की राजधानी आइजोल अब देश के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ चुकी है। बइरबी-सायरंग रेल लाइन के पूरा होने के साथ ही यह क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन गया है। असम-मिजोरम सीमा से शुरू होकर 51.38 किलोमीटर लंबी यह लाइन सायरंग तक पहुँचती है, जो आइजोल से मात्र 18 किलोमीटर दूर है। दुर्गम भू-भाग, गहरी घाटियों, घने बाँस के जंगलों और लुशाई पर्वतों से होकर गुजरने वाली इस रेल लाइन में 45 सुरंगें और 55 बड़े पुल शामिल हैं। इसमें देश का दूसरा सबसे ऊँचा पियर ब्रिज भी है, जिसकी ऊँचाई 114 मीटर है, जो कुतुब मीनार से भी ऊँचा है। यह केवल इंजीनियरिंग की सफलता नहीं, बल्कि मिजोरम के लिए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का द्वार भी है।

इस रेल परियोजना को पूरा करना आसान नहीं था। भूस्खलन, खड़ी पहाड़ियों और कठिन मानसूनी परिस्थितियों ने रेलवे की इंजीनियरिंग टीम की बड़ी परीक्षा ली। इसके बावजूद यह सपना हकीकत में बदल गया। नई रेल लाइन से मिजोरम के लोगों का जीवन बदलने जा रहा है। अब तक परिवहन धीमा और महंगा था, जिससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती थीं और यात्रा कठिन हो जाती थी। अब कोलासिब से आइजोल तक का सफर आधे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा। इससे आवश्यक वस्तुएँ सस्ती होंगी, रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे और बड़े बाजारों तक आसान पहुँच संभव होगी। त्योहारों पर लोगों को अपने घर लौटना भी अब कहीं अधिक सुगम होगा।

यह रेल लाइन केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति का कॉरिडोर है। मिजोरम की हरियाली, घाटियाँ और पहाड़ियाँ अब पर्यटकों को और आसानी से आकर्षित कर पाएंगी। यहाँ की अनोखी जनजातीय संस्कृति, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प वैश्विक मंच पर नई पहचान बनाएंगे। अगस्त 2025 में मिजोरम सरकार और आईआरसीटीसी ने मिलकर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो वर्ष का समझौता किया है। ‘डिस्कवर नॉर्थ ईस्ट बियोंड गुवाहाटी’ योजना के तहत विशेष पर्यटक ट्रेनों का संचालन होगा, जिससे सतत और किफायती पर्यटन मॉडल तैयार किया जाएगा। यह न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा, बल्कि पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह रेल लाइन बेहद अहम है। मिजोरम बांग्लादेश और म्यांमार दोनों से सीमा साझा करता है। इस कारण यह भारत की ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ का केंद्र है। नई रेल कनेक्टिविटी से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तेजी से बढ़ेगा और यह राज्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक प्रमुख परिवहन केंद्र बन सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस रेल लाइन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह केवल एक रेलवे परियोजना का समापन नहीं, बल्कि मिजोरम के लोगों के लिए एक लंबे समय से संजोए गए सपने का साकार होना है। यह विकास की उस नई लहर का प्रतीक है जो मिजोरम को देश की मुख्यधारा से और गहराई से जोड़ेगी। यह प्रमाण है कि समर्पण और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। मिजोरम अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की प्रगति और आकांक्षाओं का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Tirthankar Sarkar

संबंधित खबरें