Swine Flu Treatment: मरीज के संपर्क में आए जोखिम श्रेणी के लोगों को भी दी जाएगी टैमी फ्लू, तीन श्रेणियों में होगा इलाज
नोएडा। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। स्वाइन फ्लू के मरीज के संपर्क में आने वाले जोखिम श्रेणी के लोगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी चिकित्सकीय परामर्श पर टैमी फ्लू की दवा दी जाएगी। इसका उद्देश्य संक्रमण के जोखिम को कम करना है।
जिला अस्पताल के स्वाइन फ्लू नोडल अधिकारी डॉ. असद ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण की ओर से स्वाइन फ्लू मरीजों के उपचार को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का अध्ययन करने के बाद इन्हें लागू कर दिया गया है। मरीजों को बीमारी के लक्षण और गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा जाएगा और उसी के अनुसार उपचार किया जाएगा।
पहली श्रेणी में ऐसे मरीजों को रखा जाएगा, जिन्हें बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण हैं। इनमें उल्टी या दस्त के लक्षण हो भी सकते हैं और नहीं भी। ऐसे मरीजों को घर पर सामान्य लोगों और जोखिम श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों से अलग रखने की सलाह दी जाएगी।
पहली श्रेणी के मरीजों का इलाज उनके लक्षणों के आधार पर किया जाएगा। दिशा-निर्देशों के मुताबिक इस श्रेणी के मरीजों को टैमी फ्लू दवा देने की जरूरत नहीं होगी। यदि उनकी सेहत में सुधार होता है तो एच1एन1 की जांच कराने की भी आवश्यकता नहीं होगी।
दूसरी यानी श्रेणी-बी में उन मरीजों को रखा जाएगा, जिनमें अन्य लक्षणों के साथ तेज बुखार और गले में खराश जैसी समस्या हो। ऐसे मरीजों को होम आइसोलेशन में रखने और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार देने की व्यवस्था होगी।
इस श्रेणी में ऐसे बच्चों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिन्हें हल्की बीमारी है लेकिन वे पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रसित हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और एचआईवी, कैंसर, फेफड़े तथा गुर्दे की बीमारी समेत अन्य जोखिम वाली स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे मरीजों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
तीसरी और सबसे गंभीर श्रेणी-सी में उन मरीजों को रखा जाएगा, जिनमें सांस फूलना, सीने में दर्द, ब्लड प्रेशर कम होना, तेज बुखार या पहले से मौजूद बीमारी की स्थिति बिगड़ने जैसे गंभीर लक्षण सामने आते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सा जांच की आवश्यकता होगी।
बच्चों में पौष्टिक भोजन लेने में असमर्थता, तेज बुखार और असामान्य रूप से तेज सांस चलने जैसे लक्षण भी गंभीर श्रेणी में माने जाएंगे। इस तरह के मरीजों की तुरंत जांच कर आवश्यकता के अनुसार अस्पताल में भर्ती किया जाएगा, ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को नियमित रूप से हाथ धोने की सलाह दी है। साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने और जरूरत पड़ने पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने को कहा गया है। खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को रुमाल या टिश्यू से ढकना भी जरूरी बताया गया है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों और बंद स्थानों में मास्क पहनने तथा फ्लू जैसे लक्षण वाले या बीमार व्यक्ति से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही गंदे हाथों से बार-बार आंख, नाक और मुंह छूने से बचने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, पौष्टिक भोजन करने और पूरी नींद लेने की भी सलाह दी है। किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू से जुड़े लक्षण गंभीर होने या पहले से मौजूद बीमारी की स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया गया है। वहीं, टैमी फ्लू जैसी दवा का इस्तेमाल भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करने को कहा गया है।


