Electronic Manufacturing Cluster: यीडा के EMC 2.0 को मिली पर्यावरण मंजूरी, 206 एकड़ में विकसित होगा इलेक्ट्रॉनिक्स हब
नोएडा। यमुना विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-10 में विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी 2.0) को बड़ी मंजूरी मिल गई है। स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए), उत्तर प्रदेश ने परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। पर्यावरण अनापत्ति मिलने के बाद क्लस्टर में बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के विनिर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक यमुना सिटी के सेक्टर-10 में करीब 206 एकड़ क्षेत्रफल में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 538 करोड़ रुपये है। फिलहाल क्लस्टर में उद्योगों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने का काम चल रहा है।
प्राधिकरण ने ईएमसी 2.0 के विकास के लिए एसईआईएए के समक्ष पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया था। निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के बाद इसे मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस स्वीकृति के बाद क्लस्टर के विकास कार्यों में और तेजी आने की उम्मीद है।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर की पहली प्रमुख इकाई एसेंट-के सर्किट का शिलान्यास किया था। यह इकाई करीब 16 एकड़ भूमि पर स्थापित की जाएगी। यहां अत्याधुनिक प्रिंटेड सर्किट बोर्ड यानी पीसीबी का निर्माण किया जाएगा।
एसेंट-के सर्किट के प्लांट में तैयार होने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का इस्तेमाल मोबाइल फोन, मेडिकल उपकरण, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र समेत विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में पीसीबी एक महत्वपूर्ण घटक होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईएमसी 2.0 को एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां बनने वाले उत्पादों और उपकरणों का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरण, रक्षा और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
क्लस्टर में अन्य बड़ी कंपनियों की परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। हैवेल्स इंडिया को करीब 50 एकड़ भूमि पर अपनी इकाई स्थापित करनी है। कंपनी यहां करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा डिक्सन टेक्नोलॉजीज करीब 22.49 एकड़ भूमि पर अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार करेगी। कंपनी की योजना मोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित उत्पादन क्षमता बढ़ाने की है। बड़ी कंपनियों के साथ अन्य उद्योगों के आने से यह क्लस्टर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना के रूप में विकसित हो सकता है।
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास लगातार औद्योगिक परियोजनाओं को विकसित किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आने और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े नए उद्योग स्थापित होने की उम्मीद है।
ईएमसी 2.0 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को एक ही क्षेत्र में आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बड़ी कंपनियों के साथ उनकी सप्लाई चेन से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।
पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद अब क्लस्टर के विकास और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। परियोजना के पूरी तरह सक्रिय होने पर क्षेत्र में हजारों रोजगार पैदा होने के साथ यमुना सिटी को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।


