
Standing Work Benefits: खड़े-खड़े काम करने से कंट्रोल रहेगा ब्लड शुगर, डायबिटीज का खतरा कम
नई दिल्ली, 9 मई: आज की आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यही आदत टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और शरीर दर्द जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसके विपरीत, दिनचर्या में छोटा सा बदलाव यानी बीच-बीच में खड़े होकर काम करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि लगातार बैठने की बजाय अगर काम के दौरान बीच-बीच में खड़ा रहा जाए, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। शोध के अनुसार, लंच के बाद कुछ समय खड़े रहने से ब्लड शुगर स्तर में लगभग 43% तक कमी देखी गई, जो एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
यह अध्ययन ब्रिटेन की University of Chester के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, जिसमें लोगों की दैनिक कार्य आदतों और स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि जो लोग लंबे समय तक बैठे रहने की बजाय बीच-बीच में खड़े होकर काम करते हैं, उनमें शरीर इंसुलिन का बेहतर उपयोग करता है, जिससे भोजन के बाद शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता।
इसके अलावा, अध्ययन में यह भी पाया गया कि लगातार बैठने से होने वाले गर्दन और पीठ दर्द में भी राहत मिलती है। खड़े होकर काम करने से ऊपरी पीठ और गर्दन के दर्द में लगभग 54% तक कमी देखी गई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ा, जिससे तनाव और चिंता कम हुई और एकाग्रता व मूड बेहतर पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टैंडिंग डेस्क जैसी व्यवस्था इस बदलाव को आसान बना सकती है। यह एक ऊंची मेज होती है, जिस पर व्यक्ति खड़े होकर कंप्यूटर या अन्य ऑफिस कार्य कर सकता है। कई आधुनिक मॉडल में इसकी ऊंचाई को जरूरत के अनुसार बदला भी जा सकता है, जिससे काम करना अधिक आरामदायक हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोग 50/50 नियम अपनाएं, यानी हर 30 से 40 मिनट बैठने के बाद 10 से 20 मिनट खड़े होकर काम करें। इससे शरीर सक्रिय रहता है और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से होने वाले नुकसान कम हो जाते हैं।
इसके साथ ही सही पोस्चर बनाए रखना भी जरूरी है, जैसे कंप्यूटर स्क्रीन आंखों की सीध में हो और कोहनी 90 डिग्री के कोण पर रखी जाए। आरामदायक जूते पहनना और पैरों के नीचे एंटी-फटीग मैट का उपयोग करना भी फायदेमंद माना गया है।
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी सी आदत न केवल डायबिटीज के खतरे को कम कर सकती है, बल्कि मोटापा, थकान और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से भी बचाव में मदद कर सकती है।





