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Caste Crime | SC/ST अत्याचार मामलों में बढ़ा एक्शन, 2024 में दोषियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा

Caste Crime | SC/ST अत्याचार मामलों में बढ़ा एक्शन, 2024 में दोषियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा

नई दिल्ली, 30 जुलाई (ब्यूरो): अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान शिकायतों के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी तेजी आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत वर्ष 2023 में 53,372 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या रही। वहीं, वर्ष 2024 में इस कानून के तहत दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या बढ़कर 10,839 हो गई, जो वर्ष 2020 की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यसभा में इस संबंध में जानकारी साझा की। मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत 45,995 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और वर्ष 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 53,372 तक पहुंच गया।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में इस कानून के तहत कुल 48,669 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, 2023 की तुलना में यह संख्या कम रही, लेकिन 2020 के मुकाबले अब भी अधिक है। इससे अनुसूचित जातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों की निगरानी और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।

दोषसिद्धि के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में कुल 10,839 लोगों को दोषी ठहराया गया। यह संख्या वर्ष 2020 के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। इसके अलावा वर्ष 2024 में 5,192 मामलों में सजा सुनाई गई, जो पिछले पांच वर्षों की अवधि में सबसे अधिक बताई गई है।

मंत्रालय के अनुसार, सरकार एनसीआरबी के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों की लगातार निगरानी कर रही है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार का कहना है कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, ताकि अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सके। आंकड़ों में दर्ज मामलों और दोषसिद्धि की स्थिति से यह भी संकेत मिलता है कि ऐसे अपराधों की रिपोर्टिंग और कानूनी कार्रवाई दोनों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

 

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