SC Scholarship: अनुसूचित जाति छात्रों की छात्रवृत्ति पर सरकार का बड़ा जोर, तीन साल में खर्च बढ़कर 6,208 करोड़ रुपये
नई दिल्ली, 20 अगस्त। अनुसूचित जाति के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत खर्च बढ़ाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक योजना पर वास्तविक खर्च 2023-24 में 5,475.42 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 6,208.08 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार के अनुसार छात्रवृत्ति की केंद्रीय हिस्सेदारी अब सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है। इससे लाभार्थियों तक राशि पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने में मदद मिली है।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना मांग आधारित है। पात्र छात्रों के सत्यापित आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक केंद्रीय सहायता जारी की जाती है। योजना के तहत छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को अपना हिस्सा जारी करना होता है।
इसके बाद सत्यापित लाभार्थियों का डेटा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसी प्रक्रिया के आधार पर केंद्र की हिस्सेदारी जारी की जाती है। सरकार ने कहा है कि योजना के तहत भुगतान में देरी से संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि पात्र छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस योजना के तहत 6,186.95 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई। सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
सरकार के मुताबिक आर्थिक कारणों से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए छात्रवृत्ति के माध्यम से उन्हें वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे छात्रों को अपनी शैक्षणिक आकांक्षाओं को पूरा करने और उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।


