Sanjay Lake Drowning: संजय झील में डूबने से तीन दोस्तों की मौत, AAP विधायक ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
रिपोर्ट: रवि डालमिया
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर थाना क्षेत्र स्थित संजय झील में तीन दोस्तों की डूबने से मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और तीनों युवकों को पानी से बाहर निकाला। उन्हें तत्काल लाल बहादुर शास्त्री (LBS) अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान 22 वर्षीय साहिल, 22 वर्षीय आशीष नौटियाल और 21 वर्षीय सौरभ के रूप में हुई है। तीन दोस्तों की एक साथ मौत के बाद उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, घटना पांडव नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोटला गांव और टेम्पो मार्केट के पास स्थित संजय झील में हुई। शाम के समय तीन युवकों के झील में डूबने की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम को तत्काल मौके पर भेजा गया।
डीसीपी राजीव कुमार के मुताबिक, शाम करीब 7:24 बजे पुलिस को PCR कॉल के माध्यम से संजय झील में तीन लोगों के डूबने की सूचना मिली थी। कॉल मिलते ही पांडव नगर थाना पुलिस और संबंधित राहत टीम घटनास्थल पर पहुंची।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस को पता चला कि तीन युवक झील के पानी में डूब गए हैं। राहत अभियान चलाकर तीनों को पानी से बाहर निकाला गया। उनकी हालत गंभीर होने के कारण पुलिस उन्हें तत्काल पास के अस्पताल लेकर पहुंची।
अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मृतकों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की। तीनों की पहचान साहिल, आशीष नौटियाल और सौरभ के रूप में हुई।
पुलिस के अनुसार, साहिल और आशीष नौटियाल की उम्र करीब 22 वर्ष थी, जबकि सौरभ की उम्र करीब 21 वर्ष थी। तीनों दोस्त बताए जा रहे हैं। एक साथ तीन युवकों की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिवारों में कोहराम मच गया।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तीनों युवक संजय झील में किस उद्देश्य से गए थे और वे पानी में किन परिस्थितियों में उतरे। घटना के समय वहां अन्य लोग मौजूद थे या नहीं, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
तीनों युवकों के डूबने की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही घटनास्थल और झील के आसपास की परिस्थितियों का निरीक्षण किया गया है।
इस हादसे के बाद संजय झील की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार ने घटनास्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि संजय झील में जिस तरह से गहरी खुदाई की गई है, उसे देखते हुए वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए थे। उनका कहना है कि यदि झील के कुछ हिस्से अत्यधिक गहरे हैं तो उन स्थानों तक आम लोगों की पहुंच रोकने के लिए ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि झील के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि लोगों को खतरनाक हिस्सों तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा गार्ड क्यों नहीं तैनात किए गए थे।

विधायक का दावा है कि झील में बने गहरे हिस्से में फंसने के कारण तीनों युवकों की जान गई। हालांकि, युवकों के डूबने का वास्तविक कारण पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
AAP विधायक ने घटना को लेकर दिल्ली सरकार को भी घेरा और कहा कि सार्वजनिक स्थान होने के कारण संजय झील में आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने झील की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग उठाई।
हादसे के बाद यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि झील में ऐसे स्थान हैं जहां पानी की गहराई अचानक बढ़ जाती है तो वहां चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा उपाय किस स्तर पर मौजूद हैं। साथ ही लोगों को पानी में उतरने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
वहीं, मृतक साहिल के पिता शाहिद खान ने बताया कि उन्हें सूचना मिली कि उनका बेटा संजय झील में डूब गया है। इसके बाद उन्हें साहिल की मौत की जानकारी मिली। अचानक बेटे की मौत की खबर से परिवार गहरे सदमे में है।
साहिल के साथ आशीष और सौरभ के परिवारों में भी मातम का माहौल है। तीनों दोस्तों की एक साथ हुई मौत ने इलाके के लोगों को भी झकझोर दिया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों के बीच भी झील की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
पुलिस तीनों शवों से संबंधित आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे से ठीक पहले तीनों युवक कहां थे और किस परिस्थिति में पानी में पहुंचे।
घटना के बाद संजय झील में लोगों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि झील के गहरे हिस्सों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए और खतरनाक स्थानों पर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की जाए।
इसके अलावा सुरक्षा गार्डों की तैनाती और चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे उपायों की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि, हादसे के लिए किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी पुलिस और संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकेगी।
फिलहाल पांडव नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। तीनों युवकों के पानी में डूबने की परिस्थितियों और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। वहीं, तीन दोस्तों की एक साथ मौत के बाद तीनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है और संजय झील की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


