Chinese Citizen Fraud Case: चीनी नागरिक के सहयोगी की जमानत अर्जी खारिज, फर्जी दस्तावेजों से कंपनियां बनाकर विदेश पैसा भेजने का आरोप
नोएडा। फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों के जरिए कथित धोखाधड़ी कर एक चीनी नागरिक की मदद करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी कौशलेंद्र को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच जारी होने का हवाला देते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला नोएडा के थाना फेज-2 में दर्ज है।
पुलिस के अनुसार विदेशी नागरिकों के अवैध रूप से भारत में रहने और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनियां बनाकर विदेश में पैसा भेजने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू की थी।
जांच के क्रम में एसटीएफ ने 21 जुलाई को नोएडा के सेक्टर-83 स्थित वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पर दबिश दी थी। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान कार्यालय में चीनी नागरिक लियाओ लॉन्गहुई के साथ संजीव कुमार और कौशलेंद्र मौजूद मिले थे।
पुलिस का दावा है कि चीनी नागरिक लियाओ लॉन्गहुई वर्ष 2020 से वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में अवैध रूप से रह रहा था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान वह कई कंपनियों के माध्यम से कथित फर्जी बिलिंग और धन शोधन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था।
मामले की जांच के दौरान विभिन्न दस्तावेजों और कंपनियों से जुड़े लेनदेन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क के माध्यम से किस प्रकार कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और विदेश भेजी गई रकम का स्रोत क्या था।
गिरफ्तार आरोपी कौशलेंद्र पर चीनी नागरिक लियाओ की गतिविधियों में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार कौशलेंद्र कथित तौर पर उसके लिए नकदी लाने और ले जाने का काम करता था।
इसके अलावा आरोपी पर खातों के प्रबंधन और बैंक खाते खुलवाने में सहयोग करने का भी आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी इन गतिविधियों में आरोपी की वास्तविक भूमिका और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
मामले में जमानत की मांग करते हुए कौशलेंद्र की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पुलिस के आरोपों का विरोध करते हुए आरोपी को जमानत देने की मांग की।
बचाव पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि कौशलेंद्र की व्यक्तिगत बरामदगी से कोई फर्जी दस्तावेज नहीं मिला है। यह भी कहा गया कि आरोपी पहली बार जमानत के लिए अदालत के सामने आया है।
बचाव पक्ष ने इन आधारों पर आरोपी को जमानत दिए जाने का अनुरोध किया। वहीं मामले से जुड़े आरोपों की प्रकृति और चल रही जांच को अदालत के सामने रखा गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार नहीं की। अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच अभी जारी है।
अदालत ने कहा कि जांच जारी होने की स्थिति में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कौशलेंद्र की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
फिलहाल पुलिस चीनी नागरिक और उसके कथित सहयोगियों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। कंपनियों के गठन, बैंक खातों के संचालन, कथित फर्जी दस्तावेजों और विदेश भेजे गए धन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। कौशलेंद्र की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब आगे की जांच और अदालत में मामले की आगामी कार्यवाही पर नजर रहेगी।


