PCOS: PCOS का नाम बदलकर PMOS किया गया, महिलाओं की जटिल बीमारी को मिली नई पहचान

PCOS: PCOS का नाम बदलकर PMOS किया गया, महिलाओं की जटिल बीमारी को मिली नई पहचान

नई दिल्ली, 14 मई : महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी जटिल बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) को अब नई पहचान मिल गई है। वैश्विक चिकित्सा विशेषज्ञों की सहमति के बाद इस बीमारी का आधिकारिक नाम बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल “द लैंसेट” में प्रकाशित की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नाम बीमारी की वास्तविक प्रकृति को पहले से अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक तरीके से दर्शाता है।

चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय से “पॉलीसिस्टिक” शब्द को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ था, क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित हर महिला में ओवरी में सिस्ट नहीं पाए जाते। यही वजह थी कि कई बार बीमारी की सही पहचान और समय पर इलाज में देरी होती थी। अब PMOS नाम यह स्पष्ट करता है कि यह केवल ओवरी या प्रजनन तंत्र से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और शरीर की कई प्रणालियों को प्रभावित करने वाली गंभीर स्थिति है।

All India Institute of Medical Sciences के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर Dr. Rajesh Khadgawat ने बताया कि पहले PCOS को केवल स्त्रीरोग संबंधी बीमारी समझा जाता था, जबकि यह इंसुलिन प्रतिरोध, वजन बढ़ना, त्वचा संबंधी समस्याएं, हार्मोन असंतुलन, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता जैसी कई जटिलताओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि नया नाम डॉक्टरों और मरीजों दोनों को बीमारी को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक PMOS का प्रभाव केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। समय पर इलाज न मिलने पर यह आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, फैटी लिवर, तनाव, डिप्रेशन और चिंता जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यही कारण है कि इसे अब एक बहुआयामी स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जा रहा है।

भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार देश में लगभग 4 से 22 प्रतिशत महिलाएं PMOS से प्रभावित हैं। किशोरियों और युवा महिलाओं में खराब जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि PMOS नाम से बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और समाज में मौजूद गलत धारणाएं कम होंगी। इससे महिलाएं समय रहते जांच और उपचार के लिए आगे आएंगी। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रित रखने जैसी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के जोखिम और लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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