Bone Cancer: दुर्लभ बोन कैंसर से जूझ रही 17 वर्षीय किशोरी ने जीती जिंदगी की जंग, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई जान

Bone Cancer: दुर्लभ बोन कैंसर से जूझ रही 17 वर्षीय किशोरी ने जीती जिंदगी की जंग, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई जान
नई दिल्ली, 14 मई : राजधानी दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बोन कैंसर से पीड़ित 17 वर्षीय किशोरी का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है। किशोरी स्टेज-3 इविंग सार्कोमा नामक आक्रामक कैंसर से पीड़ित थी, जो हड्डियों में होने वाला अत्यंत दुर्लभ कैंसर माना जाता है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी दुनियाभर में लगभग 10 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति को प्रभावित करती है।
बताया गया कि किशोरी पिछले करीब एक वर्ष से पीठ के ऊपरी हिस्से में सूजन और लगातार सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। शुरुआती उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और कैंसर तेजी से फैलता हुआ उसके दाहिने फेफड़े तक पहुंच गया। स्थिति लगातार बिगड़ने पर उसे गंभीर अवस्था में फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग में भर्ती कराया गया।
अस्पताल पहुंचने के समय मरीज की हालत बेहद नाजुक थी। वह सेप्टिक शॉक, गंभीर हाइपोक्सिया और अत्यधिक निम्न रक्तचाप जैसी जानलेवा परिस्थितियों से गुजर रही थी। डॉक्टरों ने तुरंत उसे आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और इनोट्रोपिक दवाएं देना शुरू किया। जांच के दौरान पता चला कि कैंसर के कारण उसका दाहिना फेफड़ा लगभग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका था और वह केवल एक फेफड़े के सहारे सांस ले रही थी।
करीब 10 दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने लगातार गहन निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और वेंटिलेटर सपोर्ट के जरिए उसकी स्थिति को स्थिर बनाए रखा। इसके बाद विशेषज्ञों ने बड़ा जोखिम उठाते हुए कीमोथेरेपी शुरू करने का फैसला लिया। उपचार शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। बाद की मेडिकल जांचों में कैंसर को नियंत्रण में आने की पुष्टि हुई, जिससे डॉक्टरों और परिवार दोनों को बड़ी राहत मिली।
फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग के मेडिकल ऑन्कोलॉजी यूनिट के हेड डॉ. सुहैल कुरैशी ने बताया कि समय पर सही निदान, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धति ने इस किशोरी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ और गंभीर मामलों में समय पर उपचार और विशेषज्ञ देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है।
डॉक्टरों के अनुसार यह मामला आधुनिक चिकित्सा, टीमवर्क और सही समय पर इलाज की ताकत का बड़ा उदाहरण है, जिसने एक किशोरी को मौत के मुंह से वापस लाने में सफलता दिलाई।





