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Odisha Development: दो वर्षों में बदली ओडिशा की तस्वीर, विकास, निवेश और सुशासन का नया मॉडल बना राज्य

Odisha Development: दो वर्षों में बदली ओडिशा की तस्वीर, विकास, निवेश और सुशासन का नया मॉडल बना राज्य

जून 2024 में ओडिशा की जनता ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत देकर सत्ता की जिम्मेदारी सौंपी थी। यह केवल राजनीतिक बदलाव नहीं था, बल्कि विकास, सुशासन और नई संभावनाओं के प्रति जनता के विश्वास का भी प्रतीक था। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपने शुरुआती दो वर्षों में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने ओडिशा को देश के तेजी से उभरते राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। महिला सशक्तिकरण, कृषि विकास, औद्योगिक निवेश, सेमीकंडक्टर निर्माण, आधारभूत संरचना और जनकल्याण के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने विकास की गति को नई दिशा देने का प्रयास किया है। सरकार का मानना है कि ओडिशा केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और आधुनिक औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनने की क्षमता भी रखता है। यही कारण है कि पिछले दो वर्षों में राज्य में बड़े निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक परियोजनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सुभद्रा योजना सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रही है। इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को पांच वर्षों में 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक करोड़ों महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है। सरकार का दावा है कि इस पहल ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और उन्हें स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे व्यवसायों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कृषि और ग्रामीण विकास को भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री किसान योजना और समृद्ध किसान पहल के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को खेती से जोड़ने और कृषि उत्पादकता में सुधार करने पर विशेष जोर दिया गया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, ग्रामीण सड़कों के निर्माण और कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। सरकार का लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि को अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।

गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ राज्य सरकार ने अंत्योदय गृह योजना शुरू कर उन परिवारों तक आवास सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया है जो अन्य योजनाओं के दायरे से बाहर रह गए थे। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाया गया है।

औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में भी ओडिशा ने नई पहचान बनाई है। जनवरी 2025 में आयोजित ‘उत्कर्ष ओडिशा – मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव’ में राज्य को 16.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। अनुमान लगाया जा रहा है कि इन निवेशों से लगभग 12.9 लाख रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दिखाई गई रुचि इस बात का संकेत है कि ओडिशा अब निवेशकों के लिए देश के सबसे आकर्षक राज्यों में शामिल हो चुका है।

राज्य की औद्योगिक प्रगति को नई गति देते हुए अडानी समूह ने अगले पांच वर्षों में लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश ऊर्जा, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क, एल्यूमीनियम, बंदरगाह और गैस वितरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य की औद्योगिक क्षमता बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इस्पात क्षेत्र में भी ओडिशा तेजी से आगे बढ़ रहा है। जेएसडब्ल्यू समूह ने केन्दुझर में अत्याधुनिक इस्पात परियोजना स्थापित करने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू और दक्षिण कोरिया की POSCO के बीच प्रस्तावित साझेदारी के माध्यम से 65 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की संभावनाएं भी बन रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर ओडिशा देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी राज्य ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में सरकार ओडिशा को भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। Intel और अमेरिकी कंपनी 3D Glass Solutions द्वारा लगभग 3.3 बिलियन डॉलर की सेमीकंडक्टर परियोजना के लिए समझौता किया गया है। इसके अलावा कई अन्य कंपनियां भी राज्य में सेमीकंडक्टर और कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। इन परियोजनाओं से उच्च कौशल आधारित रोजगार के हजारों अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने व्यापक निवेश किया है। नए मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिससे रोजगार क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को भी सरकार ने विशेष महत्व दिया है। मुख्यमंत्री नियमित रूप से विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और जिलों का दौरा कर विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और शासन व्यवस्था अधिक संवेदनशील तथा जनोन्मुखी बने।

दो वर्षों के कार्यकाल में मोहन चरण माझी सरकार ने यह संकेत दिया है कि ओडिशा केवल संसाधन संपन्न राज्य नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार, प्रौद्योगिकी और सुशासन का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिला सशक्तिकरण से लेकर कृषि विकास, रिकॉर्ड निवेश, सेमीकंडक्टर परियोजनाओं और रोजगार सृजन तक, राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी स्पष्ट छाप छोड़ी है। विकसित ओडिशा के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए राज्य अब देश के विकास मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

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