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New Delhi : बिखरते विपक्ष का रहस्य

New Delhi (राकेश शर्मा) : आजकल विपक्ष में हो रहा बिखराव भारतीय राजनैतिक इतिहास में कोई साधारण घटना नहीं है । इसके दूरगामी परिणाम हम सब देखने वाले हैं।

समस्त विपक्ष अपने को लुटा पीटा महसूस कर रहा है और भाजपा को कोसने के अलावा किंकर्तव्यविमूढ़ की मुद्रा में शोक सभा कर कोपभवन में है ।

संदर्भ यह है की भाजपा/एनडीए को केंद्र में सरकार बचाने के लिए संख्या की कोई आवश्यकता नहीं है । वह आराम से देश की सरकार चला रही है । बंगाल में 294 में से 208 विधान सभा की सीट जीत कर भाजपा आराम से सरकार चला रही है ।

फिर यह विपक्षी पार्टियों में टूटने की सुनामी क्यों आई हुई है । बंगाल में टीएमसी के अस्सी विधायकों में से 64 ने टीएमसी से अलग होकर अलग गुट बना लिया है । टीएमसी के ही लोकसभा के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने पूरब की एक छोटी पार्टी एनसीपीआई में विलय कर टीएमसी को दिल्ली में बड़ा झटका दे दिया है । उधर आज शिव सेना (उद्धव) गुट में दूसरी बड़ी टूट हो गई । 9 में से 6 सांसदों ने शिंदे ग्रुप जॉइन कर लिया है और लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें मान्यता भी दे दी है।

मेरा मानना है की इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद के शब्दों का मनन करना चाहिए जब उन्होंने कहा था की आज विपक्ष ने यह बिल गिरा दिया है लेकिन हमने हार नहीं मानी है।

इन बिलों को पास करने के लिए संसद में दो तिहाई सांसदों का समर्थन चाहिए । मुझे लगता है इन बिलों को संसद के मानसून सत्र में पुनः लाने की तैयारी चल रही है और भाजपा के चाणक्य इस स्ट्रेटेजी पर ही काम कर रहे है।

आज उत्तरार प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जो एनडीए की सहयोगी पार्टी है उसके अध्यक्ष ओपी राजभर ने यह कहकर हलचल मचा दी की समाजवादी पार्टी के कई सांसद उनके संपर्क में हैं और सपा को छोड़ना चाह रहे है। यदि यह संभव हो गया तो मेरा अंदेशा विश्वास में बदल जाएगा की अब संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों ही बिल आसानी से पास हो जाएँगे।

राहुल की नादानी और दीनदृष्टि के कारण डीएमके कांग्रेस से बहुत नाराज़ है और उनके 22 सांसद भी शायद इन बिलों को समर्थन दे दे ।

इन बिलों के पास करवाकर भाजपा या राष्ट्र को क्या फ़ायदा होगा या इन बिलों को पास करने के लिए इतनी मेहनत क्यूँ । कुछ विपक्षी पार्टियों के तुष्टिकरण के कारण भारत में कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय में बदलाव हो चुका है और वहाँ चुनाव में एकतरफ़ा वोट पढ़ता है जो भविष्य में भारत के लिए नुक़सान का कारण बन सकता है । वैसे भी बढ़ती आबादी के कारण परिसीमन करना आवश्यक है जिससे बढ़ती आबादी को प्रतिनिधित्व मिल सके ।

महिला देश की आबादी का 50 प्रतिशत है उन्हें 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उनका देश के शासन में भागीदारी का रास्ता साफ़ होगा ।

यदि ये दोनों बिल पास हो गए तो देश की जनता इसके लिए भाजपा को शाबाशी ही देगी और उनपर कोई दोषारोपण नहीं होगा ।

बौखलाहट में उद्धव गुट के संजय राउत ने जो सरेआम गाली गुफ़्तार किया है उसे राष्ट्र की जनता ने पसंद नहीं किया है। टीएमसी की कारगुजारियों के सामने आने के बाद ममता के साथ कोई हमदर्दी नहीं रह गई है। राहुल, अखिलेश और अन्य विपक्षी नेताओं को डर सता रहा है लेकिन हताशा दिखाने के अलावा कुछ कर नहीं सकते ।

उधर राष्ट्र हित में भाजपा का हर कार्य किसी भी साम दाम दंड लगाकर प्राप्त करना भारत की जनता को स्वीकार है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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