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Noida Skywalk: स्काईवॉक निर्माण से पहले होगा ट्रैफिक सर्वे, सेक्टर-62 गोलचक्कर पर जाम रोकने की तैयारी

Noida Skywalk: स्काईवॉक निर्माण से पहले होगा ट्रैफिक सर्वे, सेक्टर-62 गोलचक्कर पर जाम रोकने की तैयारी

नोएडा। सेक्टर-62 गोलचक्कर पर प्रस्तावित स्काईवॉक परियोजना को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसी स्थान पर वर्तमान में डीएमआरसी की रिवर्स मेट्रो लाइन का निर्माण कार्य भी चल रहा है। ऐसे में दोनों परियोजनाओं का काम एक साथ शुरू होने पर एनएच-9 और आसपास के क्षेत्रों में भारी यातायात दबाव और जाम की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

इसी मुद्दे पर गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण, डीएमआरसी और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले क्षेत्र का विस्तृत ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा ताकि यातायात को प्रभावित हुए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।

नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि तीनों विभागों की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम सेक्टर-62 गोलचक्कर पर ट्रैफिक मूवमेंट, संभावित डायवर्जन मार्गों और निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन की व्यवहार्यता का अध्ययन करेगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि स्काईवॉक का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए या फिर रिवर्स मेट्रो के प्रमुख निर्माण कार्य पूरे होने के बाद।

करीब 26.34 करोड़ रुपये लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है और मार्च 2026 में निर्माण एजेंसी को वर्क ऑर्डर भी सौंप दिया गया था। प्रारंभिक स्तर पर साइट पर बैरिकेडिंग और निर्माण शुरू करने की तैयारी भी पूरी कर ली गई थी। हालांकि अब नए सिरे से ट्रैफिक डायवर्जन योजना तैयार की जाएगी।

प्रस्तावित स्काईवॉक की सबसे खास बात इसका ‘शून्य’ (0) आकार का डिजाइन है, जो नोएडा और गाजियाबाद को जोड़ने का काम करेगा। सेक्टर-62 गोलचक्कर क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 8 लाख लोगों का आवागमन होता है। इसके अलावा एनएच-9 पर हमेशा भारी ट्रैफिक दबाव बना रहता है। ऐसे में यह स्काईवॉक पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प साबित होगा।

अधिकारियों का कहना है कि यदि रिवर्स मेट्रो और स्काईवॉक दोनों परियोजनाओं का निर्माण एक साथ शुरू किया गया तो सीमित जगह के कारण जाम की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए सर्वे के माध्यम से सभी संभावित चुनौतियों का आकलन किया जाएगा।

स्काईवॉक बनने के बाद सेक्टर-62 गोलचक्कर पर पैदल यात्रियों को सड़क पार करने में सुविधा मिलेगी, दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और ट्रैफिक प्रवाह भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरी करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है, लेकिन अंतिम निर्णय ट्रैफिक सर्वे रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा।

 

 

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