Hindi Promotion Drive: बहुउपयोगी भाषा के रूप में हिंदी अपनाने पर जोर, टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित

Hindi Promotion Drive: बहुउपयोगी भाषा के रूप में हिंदी अपनाने पर जोर, टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित

नोएडा। सेक्टर-24 स्थित भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) कार्यालय में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें हिंदी के व्यापक और प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय के उप निदेशक डॉ. छबिल कुमार मेहरे ने कहा कि हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे बहुउपयोगी भाषा के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी संपर्क भाषा, राष्ट्रभाषा और मातृभाषा के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त बना सकती है, बशर्ते इसे प्रशासनिक, व्यावसायिक और दैनिक कार्यों में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाए।

डॉ. मेहरे ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिकता न रह जाए, बल्कि फाइलों, पत्राचार, बैठकों और जनसंपर्क में इसका स्वाभाविक उपयोग बढ़ाया जाए। इससे न केवल भाषा का प्रसार होगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक कार्यों को समझना भी आसान होगा। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे हिंदी के प्रोत्साहन के लिए नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाएं।

इस अवसर पर एफसीआई उत्तर क्षेत्र के कार्यकारी निदेशक अजित कुमार सिन्हा सहित पुखराज मीना और संदीप कुमार पांडेय भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि विभाग में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और राजभाषा से जुड़े निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, सेक्टर-39 स्थित सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में रहम फाउंडेशन, गाजियाबाद की ओर से 50 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षय रोग से पीड़ित मरीजों को पोषण सहायता प्रदान करना और उन्हें बीमारी के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेन्द्र कुमार ने कहा कि टीबी जैसी बीमारी से लड़ने में दवाइयों के साथ-साथ उचित पोषण भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं और सामाजिक संगठनों का सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. धीरज भार्गव, जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. आरपी सिंह, डीपीएम मंजीत कुमार, पवन भाटी और लल्लन यादव सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज बीच में न छोड़ें। जागरूकता और सामुदायिक सहयोग से ही टीबी मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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