Himachal Government: जनजातीय क्षेत्रों के विकास को नई गति: जनजातीय सलाहकार परिषद की 50वीं बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू के बड़े ऐलान

Himachal Government: जनजातीय क्षेत्रों के विकास को नई गति: जनजातीय सलाहकार परिषद की 50वीं बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू के बड़े ऐलान
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित जनजातीय सलाहकार परिषद की 50वीं बैठक में जनजातीय इलाकों के आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों के चलते जनजातीय क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास हुआ है और आज ये क्षेत्र प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक सूचकांकों और जीवन स्तर के मामले में प्रदेश के अन्य हिस्सों से आगे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार परिवहन क्षेत्र में बड़ा कदम उठा रही है। पात्र युवाओं को बस और ट्रेवलर वाहन खरीदने पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी, साथ ही सड़क कर में चार महीने की छूट भी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी जनजातीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। निजी क्षेत्र में 250 किलोवाट से लेकर एक मेगावाट तक की सौर परियोजनाएं लगाने पर ब्याज उपदान दिया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
मुख्यमंत्री ने बर्फबारी वाले इलाकों में विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि मार्च-अप्रैल में मौसम अनुकूल होते ही निर्माण कार्य शुरू किए जा सकें। पांगी और स्पीति में बिजली आपूर्ति की समस्या के स्थायी समाधान के लिए पांगी के धनवास में 1.2 मेगावाट और स्पीति के रोंगटोंग में 2 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र जल्द ही चालू किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिपकी-ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से लगातार संवाद कर रही है। इसके साथ ही चीन अधिकृत तिब्बत में व्यापारिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जिससे सीमावर्ती जनजातीय क्षेत्रों को आर्थिक लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। इन इलाकों में जन्म के समय लिंगानुपात बेहतर है और महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किन्नौर जिले में संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निगुल सरी क्षेत्र में नई सड़क का निर्माण किया जाएगा, ताकि बार-बार बाधित होने वाली सड़क समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ स्वीकृत करना सरकार की प्राथमिकता है और इस संबंध में प्रस्ताव को राज्यपाल के अनुमोदन के लिए भेजा जा चुका है। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी अधिनियम के तहत सितंबर 2025 तक 1,039 पट्टे वितरित किए जा चुके हैं। किन्नौर और स्पीति के लोगों की सुविधा के लिए रामपुर में जनजातीय भवन का निर्माण प्रगति पर है, जबकि नूरपुर जनजातीय भवन शीघ्र जनता को समर्पित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पांगी घाटी को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। इसके साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना की शुरुआत स्पीति से की गई थी। जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी लगातार मजबूत किया गया है। यहां क्षेत्रीय अस्पताल, नागरिक अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुर्वेदिक अस्पताल, पशु चिकित्सालय और हजारों किलोमीटर सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है, जिनमें अधिकांश सड़कें पक्की हैं।
बैठक में बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम 2025-26 के लिए 638.73 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कर लिया गया है और पांगी, लाहौल और भरमौर में इन परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जनजातीय इलाकों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाए, ताकि वहां के लोगों को बेहतर जीवन स्तर और समान अवसर मिल सकें।
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