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New Delhi: जेन ज़ी को समझने के लिए 24 कैरेट खरे कंटेंट की ज़रूरत: युवराज मलिक

New Delhi: जेन ज़ी को समझने के लिए 24 कैरेट खरे कंटेंट की ज़रूरत: युवराज मलिक

नई दिल्ली, 18 जनवरी। जेन ज़ी को अक्सर अलग पीढ़ी या अलग सोच वाला वर्ग माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि यह पीढ़ी हमारी ही सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रक्रिया की देन है। अगर हम चाहते हैं कि जेन ज़ी अपनी जिम्मेदारियों, क्षमताओं और मूल्यों को समझे, तो हमें उनके सामने 24 कैरेट खरा कंटेंट परोसना होगा। ऐसा कंटेंट जो केवल मनोरंजन तक सीमित न हो, बल्कि कहानियों, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ा हो। यह विचार राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) भारत के निदेशक और नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के सीईओ युवराज मलिक ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के समापन दिवस पर व्यक्त किए।

थीम पवेलियन में आयोजित बाल पुस्तकों के विशेष लोकार्पण कार्यक्रम और ‘विद्या’ तथा ‘छोटा भीम-बिग ग्रीन मिशन’ के शुभारंभ अवसर पर युवराज मलिक ने कहा कि स्टोरीटेलिंग भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। आज की तेज़ रफ्तार डिजिटल दुनिया में बच्चों और अभिभावकों, विशेषकर युवा माताओं के पास बच्चों को सुनाने के लिए सार्थक कहानियों का अभाव होता जा रहा है। सोशल मीडिया फीड और इंस्टाग्राम रील्स से जिम्मेदार और संवेदनशील पीढ़ी का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके लिए ज़रूरी है कि बच्चों को ऐसा साहित्य उपलब्ध कराया जाए जो उन्हें नैतिक मूल्यों, संस्कृति और अपनी जड़ों से जोड़ सके।

कार्यक्रम में एनबीटी इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम और बिसलेरी इंटरनेशनल के निदेशक के. गणेश भी मौजूद रहे। इस अवसर पर एनबीटी की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’ के अंतर्गत प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ उन्हें भारतीय साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। शुरुआती चरण में रंगीन चित्रों से सुसज्जित सात पुस्तकों को प्रकाशित किया गया है, जिनमें प्रेमचंद की ‘मिट्ठू’, आचार्य शिवपूजन सहाय की ‘कुंजी’, भीष्म साहनी की ‘चमगादड़ का रस’ और ‘दो गौरैया’, सुदर्शन की ‘साइकिल की सवारी’, अमरकांत की ‘बहादुर’ और विष्णु प्रभाकर की ‘सबसे सुंदर लड़की’ शामिल हैं। इन कहानियों का चयन विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों की मानसिक समझ और रुचि को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि वे इनसे सहज रूप से जुड़ सकें।

इसके साथ ही एनबीटी इंडिया के बाल पुस्तकालय को और समृद्ध करने के उद्देश्य से छह द्विभाषी बाल पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। इन पुस्तकों को इस तरह तैयार किया गया है कि हर बच्चा अपनी मातृभाषा में पढ़ने का आनंद ले सके। ‘भारत के मधुर रंग’, ‘पानी ही पान’, ‘पूंछ’, ‘मददगार हाथ’, ‘क्या करें रावण का!’, ‘अचंभा अष्टभुजा’ और ‘आजाद करो’ जैसी पुस्तकें प्री-स्कूल से लेकर आठ वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई हैं।

युवराज मलिक ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि पुस्तक मेले और ऐसी पहलें सांस्कृतिक विरासत को दोबारा जीवंत करने का माध्यम हैं। लक्ष्य यह होना चाहिए कि कोई भी बच्चा किताबों से वंचित न रहे, हर हाथ में किताब हो और हर बच्चा अपनी पसंद की पुस्तक अपनी भाषा में पढ़ सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कंटेंट की भूमिका बेहद अहम है और मजबूत, मूल्य-आधारित कंटेंट के जरिए ही एक जिम्मेदार पीढ़ी तैयार की जा सकती है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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