New Delhi: सशस्त्र बलों को सलाम के साथ शुरू होगा नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026

New Delhi: सशस्त्र बलों को सलाम के साथ शुरू होगा नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026
नई दिल्ली, 8 जनवरी। दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक आयोजनों में शुमार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का शुभारंभ इस बार देश की सशस्त्र सेनाओं को समर्पित भावना के साथ किया जा रहा है। 10 से 18 जनवरी तक भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस नौ दिवसीय मेले में 35 से अधिक देशों के एक हजार से ज्यादा प्रकाशक, देश-विदेश के नामी और नवोदित लेखक तथा लाखों पुस्तक प्रेमी हिस्सा लेंगे। यह मेला न केवल साहित्य और संस्कृति का उत्सव होगा, बल्कि भारत की सैन्य परंपरा, शौर्य और बौद्धिक विरासत को भी सम्मान देगा।
कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे ने बताया कि भारत ने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं और इसी अवसर पर इस वर्ष के पुस्तक मेले की थीम “भारतीय सैन्य इतिहास : शौर्य एवं प्रज्ञा@75” रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह थीम देश की सशस्त्र सेनाओं के बलिदान, साहस और बौद्धिक परंपरा को नमन करती है और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगी।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि नए साल की शुरुआत पुस्तकों के साथ करने के उद्देश्य से इस बार पुस्तक मेले में प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है। उन्होंने विशेष रूप से जेन जी को किताबों से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि मेले के भीतर होने वाली किसी भी गतिविधि के लिए भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। साहित्य, संस्कृति और विचारों के इस उत्सव में हर आयु वर्ग के लोगों को खुलकर भाग लेने का अवसर मिलेगा।
मेले के सह-आयोजक भारत व्यापार संवर्द्धन संगठन के कार्यकारी निदेशक प्रेमजीत लाल ने कहा कि यह पुस्तक मेला दो पीढ़ियों के बीच सेतु का काम करेगा, जहां अनुभवी पाठकों के साथ-साथ युवा वर्ग भी ज्ञान और रचनात्मकता की दुनिया से जुड़ेगा।
इस वर्ष के मेले में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता भी बेहद मजबूत रहने वाली है। फोकस देश कतर के राजदूत मोहम्मद हसन जबीर अल जाबेर ने इसे विश्व के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों में से एक बताते हुए कहा कि भारत और कतर दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे हैं। दोहा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के निदेशक जसीम अहमद अल बुऐनैन ने कहा कि मेले में कतर की संस्कृति पर आधारित गतिविधियां और लाइव कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे।
भारत में फ्रेंच इंस्टीट्यूट के निदेशक ग्रेगोर ट्रुमेल ने बताया कि 2026 को भारत–फ्रांस नवाचार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, ऐसे में पुस्तक मेले में फ्रांस की भागीदारी और समर्पित फ्रेंच पवेलियन का विशेष महत्व है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत हिंदी में “नमस्कार दोस्तों” कहकर की, जिसे सुनकर उपस्थित लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने “फिर मिलेंगे पुस्तक मेले के पवेलियन में, धन्यवाद” कहकर सभी का दिल जीत लिया।
पुस्तक मेले में लेखकों की सुविधा के लिए विशेष लेखक लॉउंज की व्यवस्था की गई है, जहां लेखक अपने परिवार और मित्रों के साथ विश्राम कर सकेंगे और चाय-कॉफी का आनंद ले सकेंगे। इसके साथ ही कतर और स्पेन के अलावा रूस, जापान, फ्रांस, पोलैंड, ईरान, हंगरी और चिली जैसे कई देशों की सहभागिता देखने को मिलेगी।
मेले के दौरान बुक लॉन्च, बहुभाषी कविता संध्याएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गेमिंग व विरासत जैसे समकालीन विषयों पर संवाद आयोजित किए जाएंगे। पीयूष मिश्रा, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, कैलाश सत्यार्थी और रिकी केज जैसी नामचीन हस्तियां मेले की शोभा बढ़ाएंगी। बच्चों के लिए ‘किड्ज़ एक्सप्रेस’ पवेलियन और 6,000 से अधिक मुफ्त ई-पुस्तकों की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 साहित्य, संस्कृति, विचार और राष्ट्रभक्ति का एक भव्य संगम बनने जा रहा है, जो भारत में पढ़ने की संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।





