
New Delhi : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन बिल के पारित न हो पाने को महिलाओं के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को संसद में जो कुछ हुआ, वह हर उस महिला के लिए पीड़ादायक और निराशाजनक है, जो अपने अधिकार और सम्मान की उम्मीद रखती है। मुख्यमंत्री ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित समिट में काली पट्टी बांधकर विपक्ष की महिला विरोधी राजनीति के खिलाफ विरोध दर्ज कराया, जहां महिला अधिकारों को लेकर जोरदार नारेबाजी भी हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बेटियों को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी दिलाने के उद्देश्य से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ प्रस्तुत किया, जो महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों ने इस अवसर को भी संकीर्ण राजनीति की नजर से देखा और महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के नाते यह मुद्दा उनके लिए केवल राजनीति नहीं, बल्कि संवेदना और सम्मान का विषय है। उनका कहना था कि करोड़ों महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने का महत्वपूर्ण अवसर उनसे छीन लिया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाले नेताओं को उनके क्षेत्रों की महिलाएं जवाब देंगी।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पहले भी महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधा डालते रहे हैं और उनकी सोच महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति उनकी वास्तविक नीयत को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं इस घटनाक्रम को समझ रही हैं और इसके खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया अवश्य देंगी।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स द्वारा आयोजित नेशनल वूमेन एंटरप्रेन्योर्स समिट 2026 में महिला उद्यमियों ने भी संविधान संशोधन बिल के पारित न होने पर आक्रोश व्यक्त किया। कार्यक्रम में महिलाओं ने विरोध दर्ज कराते हुए इसे उनके अधिकारों के साथ अन्याय बताया और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महिला उद्यमिता की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें महिला उद्यमियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आज महिलाएं स्मॉल बिजनेस, स्टार्टअप, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व कर रही हैं और आर्थिक विकास की धुरी बन रही हैं। उनके नवाचार और आत्मनिर्भरता देश को नई दिशा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों को और मजबूती देने की जरूरत है, ताकि महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सकें।
कार्यक्रम में चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल सहित बड़ी संख्या में महिला उद्यमी उपस्थित रहीं। महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए देश के विकास में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास के लिए प्रतिबद्ध है।





