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नई दिल्ली: आधुनिक दुनिया में शांति सैनिकों की भूमिका में आ रहा बदलाव : उप सेना प्रमुख

नई दिल्ली: -संघर्ष क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाली के लिए शांति सैनिकों की मांग में इजाफा

नई दिल्ली, 21 जनवरी : दुनिया भर में शांति सैनिकों के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों का समाधान और शांति स्थापना अभियानों के प्रभाव व स्थिरता को बढ़ाने के लिए मानेकशॉ सेंटर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में ‘समकालीन खतरों के लिए आधुनिक शांति स्थापना रणनीतियों को अपनाना’ विषय पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल और उप सेना प्रमुख (सूचना प्रणाली और संचार) लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस संगोष्ठी का आयोजन संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) ने भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र (सीएलएडब्लूएस) के सहयोग से दिल्ली कैंट में किया।

इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने कहा, आधुनिक दुनिया में शांति सैनिकों की भूमिका में बदलाव आ रहा है। जिसके चलते मानवीय चिंताओं को दूर करने, सामुदायिक जुड़ाव में योगदान देने और संघर्ष विराम बनाए रखने और हिंसा को रोकने के अलावा संघर्ष के बाद सामान्य स्थिति की बहाली में सहायता करने के लिए शांति सैनिकों की मांग में इजाफा हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र को अब मानवीय चिंताओं को संबोधित करना चाहिए, सामुदायिक जुड़ाव का समर्थन करना चाहिए और संघर्ष के बाद की स्थिति से उबरने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

दरअसल, शांति स्थापना अभियानों का वैश्विक परिदृश्य पहले के मुकाबले काफी ज्यादा विकसित हो चुका है, जिसमें दुनिया भर में संघर्ष क्षेत्रों में नई चुनौतियाँ उभर रही हैं। आज, शांति सैनिकों से युद्ध विराम बनाए रखने और हिंसा को रोकने की पारंपरिक भूमिकाओं से आगे जाने की उम्मीद की जाती है। यह सेमिनार शांति स्थापना के इन नए आयामों की खोज करने और भविष्य के संचालन में उनके एकीकरण के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

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