Men Health Awareness: ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ की सोच पड़ रही भारी, पुरुष स्वास्थ्य पर बढ़ रहा संकट
नई दिल्ली। समाज में लंबे समय से प्रचलित कहावत ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ आज पुरुषों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। परिवार, नौकरी और सामाजिक जिम्मेदारियों के दबाव में अधिकांश पुरुष अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। छोटी-छोटी तकलीफों को अनदेखा करने की यही आदत कई बार गंभीर बीमारियों को समय पर पहचानने से रोक देती है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बड़ी संख्या में पुरुष जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का सामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आंकड़े बताते हैं कि देश के लगभग 46 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी लाइफस्टाइल डिजीज से प्रभावित हैं। हृदय रोग पुरुषों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है, जबकि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और मुंह के कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

Dr. Rajeev Kumar ने विश्व पुरुष स्वास्थ्य जागरूकता दिवस के अवसर पर कहा कि इस दिवस का उद्देश्य पुरुषों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पुरुषों को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। अक्सर लोग दर्द, थकान या अन्य लक्षणों को सामान्य मानकर टाल देते हैं, जबकि यही संकेत किसी गंभीर बीमारी की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, लगातार थकान महसूस होना, बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना, पेशाब में दिक्कत या खून आना, लंबे समय तक खांसी बने रहना, मुंह का घाव ठीक न होना, अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या और अवसाद जैसे लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।
Dr. Abhijeet Rao के अनुसार अधिकांश जीवनशैली जनित बीमारियां शुरुआती दौर में ‘साइलेंट डिजीज’ की तरह होती हैं। इनमें लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि 40 वर्ष की आयु के बाद पुरुषों को हर वर्ष ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच अवश्य करानी चाहिए। साथ ही आंखों की नियमित जांच भी स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग या अचानक कार्डियक डेथ का इतिहास रहा हो, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ईसीजी और टीएमटी जैसी हृदय संबंधी जांच समय-समय पर करानी चाहिए। वहीं 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पीएसए टेस्ट और बड़ी आंत से जुड़ी बीमारियों की पहचान के लिए कोलोनोस्कोपी जैसी जांचों पर भी ध्यान देना चाहिए।

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की लचक बनाए रखना भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित स्ट्रेचिंग और शारीरिक गतिविधियां मांसपेशियों और हड्डियों के क्षरण की गति को कम करती हैं। इससे शरीर की कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है और दैनिक जीवन की गतिविधियां आसानी से की जा सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि धूम्रपान और शराब से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण स्वस्थ जीवन की बुनियाद हैं। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि और 7 से 8 घंटे की नींद शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही सबसे प्रभावी बचाव है। पुरुषों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, ताकि वे लंबा, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकें।


