Lung Failure Clinic: फेफड़ों के गंभीर मरीजों को एक छत के नीचे मिलेगा ट्रांसप्लांट तक का इलाज, दिल्ली में शुरू हुई विशेष सुविधा
नई दिल्ली, 21 अगस्त। फेफड़ों की गंभीर और अंतिम चरण की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच से लेकर लंग ट्रांसप्लांट तक के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फोर्टिस शालीमार बाग और फोर्टिस वसंत कुंज में विशेष ‘लंग फेलियर क्लीनिक’ शुरू किए गए हैं, जहां मरीजों को मल्टीडिसीप्लीनरी तरीके से एकीकृत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
इन क्लीनिकों में एडवांस और एंड-स्टेज लंग डिजीज से पीड़ित मरीजों की जांच, बीमारी का प्रबंधन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, लंग ट्रांसप्लांट के लिए मूल्यांकन और ट्रांसप्लांट के बाद नियमित फॉलो-अप तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकने के बजाय एक ही व्यवस्था के तहत जरूरी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना है।
लंग फेलियर क्लीनिक में पल्मोनोलॉजिस्ट, लंग ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट और अन्य संबंधित विशेषज्ञ मिलकर प्रत्येक मरीज की स्थिति का आकलन करेंगे। इसके आधार पर मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाएगी। इससे बीमारी के अलग-अलग चरणों में जरूरी उपचार और ट्रांसप्लांट की आवश्यकता का समय रहते आकलन करने में मदद मिलेगी।
क्लीनिक में एडवांस पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट की सुविधा के साथ ब्रॉन्कोस्कोपी और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मरीज की शारीरिक स्थिति और उपचार की जरूरत के अनुसार नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन तथा अन्य जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा सकेगी।
फेफड़ों की गंभीर बीमारी का प्रभाव केवल सांस लेने की क्षमता तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक बीमारी से जूझने वाले मरीजों में पोषण, नींद और शारीरिक क्षमता से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसी को देखते हुए क्लीनिक में पोषण परामर्श, नींद का मूल्यांकन और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन जैसी सुविधाओं को भी उपचार व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
इसके अलावा मरीज और उनके परिजनों की काउंसलिंग भी की जाएगी। खासकर लंग ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों और परिवारों को पूरी प्रक्रिया, उपचार और ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल के बारे में जानकारी देने पर जोर रहेगा।
फोर्टिस शालीमार बाग में विशेष लंग फेलियर क्लीनिक मंगलवार और शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से दो बजे तक संचालित होगा। यहां गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों का विशेषज्ञ टीम द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।
इसी अस्पताल में हाल ही में 29 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट का डबल लंग ट्रांसप्लांट किया गया। मरीज को वर्ष 2021 में इंटरस्टिशियल लंग डिजीज का पता चला था। समय के साथ बीमारी बढ़ती गई और फेफड़ों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती रही।
वर्ष 2025 तक स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मरीज को लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ने लगी। बीमारी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए लंग ट्रांसप्लांट का फैसला लिया गया। मई 2026 में मरीज का सफल डबल लंग ट्रांसप्लांट किया गया।
इस मामले को गंभीर फेफड़ों की बीमारी में समय पर विशेषज्ञ मूल्यांकन और ट्रांसप्लांट की भूमिका के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। नए लंग फेलियर क्लीनिक के माध्यम से ऐसे मरीजों की बीमारी की गंभीरता का समय रहते आकलन कर उपचार से लेकर जरूरत पड़ने पर ट्रांसप्लांट तक की प्रक्रिया को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है।


