Lung Cancer Screening: लंग कैंसर की जल्द पहचान से घट सकती हैं मौतें, LDCT स्क्रीनिंग को बताया प्रभावी हथियार
नई दिल्ली, 26 अगस्त। फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए बीमारी की शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूरोप में लंग कैंसर अब भी कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी बड़ी वजह कई मरीजों में बीमारी का पता देर से लगना है, जब उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं।
लंग कैंसर पॉलिसी नेटवर्क की रिपोर्ट ‘फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग को आगे बढ़ाना: यूरोप में क्रियान्वयन के अनुभवों से सीख’ में कम खुराक वाली सीटी स्कैन यानी लो-डोज कंप्यूटेड टोमोग्राफी (LDCT) स्क्रीनिंग को हाई-रिस्क आबादी में लंग कैंसर की शुरुआती पहचान के प्रभावी तरीकों में बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक लक्षित LDCT स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर का पता ऐसे शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है, जब बीमारी के उपचार की संभावनाएं अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। समय पर बीमारी की पहचान और उसके बाद उचित इलाज तक पहुंच सुनिश्चित कर लंग कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज में एम्स दिल्ली के डॉ. भीमराव अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शंकर को भी योगदानकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। यह लंग कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ प्रतिनिधित्व को भी दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब चुनौती केवल यह साबित करना नहीं है कि लंग कैंसर स्क्रीनिंग उपयोगी है, बल्कि इसे स्वास्थ्य सेवाओं का गुणवत्तापूर्ण, समान, व्यापक और टिकाऊ हिस्सा बनाने की है। इसके लिए केवल जांच की सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। हाई-रिस्क लोगों की पहचान से लेकर जांच, फॉलो-अप और समय पर इलाज तक पूरी व्यवस्था को आपस में जोड़ना होगा।
रिपोर्ट में हाई-रिस्क आबादी की पहचान को महत्वपूर्ण बताया गया है। केवल उम्र और धूम्रपान की स्थिति को आधार बनाने के बजाय मल्टी-वेरिएबल रिस्क मॉडल का इस्तेमाल करने से उन लोगों की अधिक सटीक पहचान की जा सकती है, जिनमें लंग कैंसर विकसित होने का खतरा ज्यादा है। इससे स्क्रीनिंग कार्यक्रम को अधिक लक्षित और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सेवाओं से अपेक्षाकृत दूर और वंचित आबादी तक स्क्रीनिंग की पहुंच बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए लक्षित जागरूकता अभियान और सक्रिय आमंत्रण की जरूरत है। स्क्रीनिंग सुविधा मौजूद होने के बावजूद यदि हाई-रिस्क व्यक्ति जांच तक नहीं पहुंचते तो कार्यक्रम का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा।
रिपोर्ट में लंग कैंसर स्क्रीनिंग के साथ धूम्रपान छोड़ने में सहायता देने वाली सेवाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इससे स्क्रीनिंग के साथ भविष्य में बीमारी के जोखिम को कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
इसके अलावा स्क्रीनिंग कार्यक्रम के लिए मजबूत स्वास्थ्य ढांचे को आवश्यक बताया गया है। इसमें नोड्यूल मैनेजमेंट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्धारित गुणवत्ता मानक, आगे की जांच की पर्याप्त सुविधा और कैंसर की पुष्टि होने पर समय पर उपचार की व्यवस्था शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रीनिंग में संदिग्ध स्थिति सामने आने के बाद मरीज को लंबे समय तक अगली जांच या इलाज का इंतजार करना पड़े तो शुरुआती पहचान का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए स्क्रीनिंग से लेकर डायग्नोसिस और उपचार तक एक स्पष्ट और तेज क्लिनिकल प्रक्रिया तैयार करना जरूरी है।
रिपोर्ट का प्रमुख संदेश है कि लंग कैंसर स्क्रीनिंग की सफलता केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने में नहीं है। वास्तविक सफलता हाई-रिस्क लोगों की सही पहचान, शुरुआती चरण में बीमारी का पता लगाने और मरीज को समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराने में है।


