Loan App Blackmail: कर्ज लेने वालों की तस्वीरें अश्लील बनाकर करते थे ब्लैकमेल, छह साइबर जालसाज गिरफ्तार; 25 लाख की ठगी का खुलासा
नोएडा। निजी लोन एप के जरिये कर्ज लेने वाले लोगों की जानकारी जुटाकर उन्हें ब्लैकमेल करने और लाखों रुपये ऐंठने वाले साइबर गिरोह का नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सेक्टर-141 से गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पीड़ितों की तस्वीरों को एडिट कर अश्लील रूप देते थे और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर बदनाम करने की धमकी देकर रकम वसूलते थे। अब तक म्यूल बैंक खातों के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, चार एटीएम/डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, दो ड्राइविंग लाइसेंस, दो पर्स और 810 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच कर गिरोह के नेटवर्क और ठगी की अन्य घटनाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि सूचना के आधार पर सोमवार को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान नई दिल्ली के कापासेड़ा निवासी निशांत कुमार, याकूबपुर सेक्टर-83 निवासी अनीस अली और आदित्य कुमार, बिहार के वैशाली निवासी पंकज कुमार तथा बुलंदशहर निवासी निक्की शर्मा और शिवा शर्मा के रूप में हुई है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी निजी लोन एप के जरिये कर्ज लेने वाले लोगों से संबंधित जानकारी जुटाते थे। इसके बाद उन्हें अपने जाल में फंसाने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी पीड़ितों से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे यूपीआई या क्यूआर कोड के माध्यम से रकम मंगाई जाती थी।
इसके बाद पीड़ितों की तस्वीरों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता था। आरोप है कि साइबर जालसाज तस्वीरों को एडिट कर अश्लील रूप में तैयार करते और फिर इन्हें संबंधित व्यक्ति को भेजकर डराते थे।
पीड़ितों को धमकी दी जाती थी कि यदि उन्होंने मांगी गई रकम नहीं दी तो एडिट की गई तस्वीरें उनके परिचितों या अन्य लोगों तक पहुंचा दी जाएंगी। सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर का फायदा उठाकर उनसे बार-बार रकम मांगी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक कई मामलों में पीड़ित डर के कारण आरोपियों की मांग के अनुसार रकम भेज देते थे। इसके बाद आरोपी उनसे दूसरी बैंक खातों में भी रुपये जमा करवाते थे।
ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों के माध्यम से साइबर अपराध से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस का दावा है कि अब तक की जांच में आरोपियों द्वारा म्यूल बैंक खातों के जरिये करीब 25 लाख रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है जिनमें पीड़ितों से वसूली गई रकम भेजी गई थी। खाताधारकों और इन खातों को उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर भी आरोपियों से संबंधित पांच शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात से एक-एक शिकायत तथा महाराष्ट्र से दो शिकायतें दर्ज हैं।
अलग-अलग राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद पुलिस गिरोह के नेटवर्क की व्यापकता की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार छह आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल डेटा, संपर्क नंबर, लेनदेन की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसके आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों और संभावित पीड़ितों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
साइबर पुलिस ने लोगों को इस तरह की ब्लैकमेलिंग से सतर्क रहने की सलाह भी दी है। यदि कोई व्यक्ति एडिट की गई अश्लील तस्वीर भेजकर पैसे मांगता है तो डरकर तत्काल भुगतान नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में आरोपी के मोबाइल नंबर, चैट, संदेश, बैंक खाते, यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। इन साक्ष्यों को डिलीट करने के बजाय पुलिस को उपलब्ध कराया जाना जांच में मददगार हो सकता है।
साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। समय रहते सूचना देने से संबंधित लेनदेन और बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल साइबर क्राइम थाना पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड, बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


