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Noida Cyber Crime: विदेशी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, सरगना समेत चार गिरफ्तार

Noida Cyber Crime: विदेशी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, सरगना समेत चार गिरफ्तार

नोएडा में साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो यूरोप और अमेरिका के नागरिकों से तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी कर रहे थे।

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस के आधार पर सेक्टर-76 क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान मोहम्मद बिलाल, देव कपाही, मुखेजा और कुशाग्र निम्बेकर के रूप में हुई है। इनमें बिलाल को गिरोह का सरगना बताया जा रहा है।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में दिए गए टोल-फ्री नंबर देखकर विदेशी नागरिक खुद कॉल करते थे। कॉल रिसीव करने के बाद आरोपी खुद को किसी बड़ी कंपनी का टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर पीड़ितों को अपने झांसे में लेते थे।

इसके बाद आरोपी पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस को हैक कर लिया गया है और उनका डेटा खतरे में है। डर का माहौल बनाने के लिए वे स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बनाते और स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे, जिससे पीड़ित घबरा जाता और उनकी बातों पर भरोसा करने लगता।

जब आरोपी को पीड़ित के सिस्टम का एक्सेस मिल जाता था, तब वे उसकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। खाते में मौजूद रकम के अनुसार आरोपी अलग-अलग तरीके से ठगी करते थे। यदि खाते में कम रकम होती तो 350 से 2000 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते थे, जबकि अधिक रकम होने पर मामला तथाकथित सीनियर एजेंट को ट्रांसफर कर दिया जाता था, जो बड़े स्तर पर ठगी करता था।

ठगी से प्राप्त रकम को आरोपी क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से ट्रांसफर कर लेते थे, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ रकम हवाला के जरिए भी ट्रांसफर की जा रही थी, जिसकी जांच की जा रही है।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि सभी आरोपी उच्च शिक्षित हैं और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर आसानी से विदेशी नागरिकों को अपने जाल में फंसा लेते थे। पुलिस ने इनके पास से चार लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, चार माइक्रोफोन हेडफोन और दो राउटर बरामद किए हैं।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह अब तक 250 से अधिक विदेशी नागरिकों को ठग चुका है और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है। कॉल सेंटर का संचालन आरोपियों ने करीब दो महीने पहले शुरू किया था और इसके लिए उन्होंने एक इमारत को लगभग 40 हजार रुपये प्रतिमाह के किराये पर लिया हुआ था। उनके पास इस कार्य के लिए कोई वैध लाइसेंस भी नहीं था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिल सके। साथ ही, इस पूरे मामले में जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या टेक सपोर्ट विज्ञापन पर भरोसा न करें। किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर को केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ही सत्यापित करें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति को स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति न दें।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी केवल तकनीकी खामियों का ही नहीं, बल्कि लोगों के डर और मनोवैज्ञानिक दबाव का भी फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अगर किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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