Kidney Donation: भाई की रक्षा के लिए बहन ने दान की किडनी, रक्षाबंधन पर सोनाली ने सुप्रीयो को दिया जीवन का अनमोल उपहार
नई दिल्ली। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है, लेकिन 52 वर्षीय सोनाली चक्रवर्ती ने इस रिश्ते को अपने त्याग से एक नई मिसाल दे दी। अंतिम चरण की किडनी बीमारी से जूझ रहे अपने 54 वर्षीय भाई सुप्रीयो चक्रवर्ती की जिंदगी बचाने के लिए सोनाली ने अपनी किडनी दान कर दी।
सुप्रीयो लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी के साथ हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और वैस्क्यूलर डैमेज जैसी समस्याएं भी थीं। बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद उनके लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही महत्वपूर्ण उपचार विकल्प रह गया था।
भाई को लगातार डायलिसिस और बीमारी की तकलीफ से गुजरते देखकर सोनाली ने किडनी दान करने का फैसला किया। वह बिना किसी हिचकिचाहट के डोनर बनने के लिए आगे आईं। जरूरी मेडिकल जांच और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी करने के बाद डॉक्टरों ने किडनी प्रत्यारोपण की तैयारी की।
फोर्टिस अस्पताल, नोएडा में नेफ्रोलॉजी की निदेशक डॉ. अनुजा पोरवाल और यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. शैलेंद्र कुमार गोयल के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया।
डॉक्टरों के मुताबिक यह प्रत्यारोपण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था। डुअल रीनल आर्टरी को नए सिरे से तैयार करना पड़ा, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया में विशेष सावधानी और विशेषज्ञता की जरूरत थी। मेडिकल टीम ने चुनौती के बावजूद सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण पूरा किया।
ऑपरेशन के बाद सबसे राहत की बात यह रही कि प्रत्यारोपित किडनी ने तत्काल काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद सुप्रीयो की हालत में तेजी से सुधार दर्ज किया गया। डॉक्टरों ने मरीज की रिकवरी को सकारात्मक बताया।
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते की कहानी भी जुड़ी है। सोनाली ने बताया कि अपने भाई को डायलिसिस और बीमारी की तकलीफ से गुजरते देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। ऐसे में जब किडनी दान करके भाई की जिंदगी बेहतर बनाने का अवसर मिला तो उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया।
वहीं, सुप्रीयो ने अपनी बहन को अपने जीवन का ‘फरिश्ता’ बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन ने इस बार केवल राखी बांधकर रक्षा की कामना नहीं की, बल्कि अपनी किडनी देकर उनकी जिंदगी की रक्षा की है।
रक्षाबंधन से ठीक पहले सामने आई यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, समर्पण और त्याग की मिसाल बन गई है। सामान्य तौर पर रक्षाबंधन को भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प से जोड़ा जाता है, लेकिन सोनाली और सुप्रीयो की कहानी ने इस रिश्ते में एक अलग संदेश दिया है।
डॉक्टरों ने भी इसे अंगदान के महत्व को सामने लाने वाली प्रेरक मिसाल बताया। जीवित अंगदान के जरिए जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिल सकता है, हालांकि इसके लिए डोनर और मरीज की विस्तृत मेडिकल जांच तथा विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होती है।
सोनाली के इस फैसले ने रक्षाबंधन के पर्व को उनके परिवार के लिए हमेशा के लिए यादगार बना दिया। भाई की लंबी उम्र की कामना के साथ अपनी किडनी दान कर उन्होंने भाई-बहन के प्रेम और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की है।


