नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्य, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, रक्षा उत्पादन, कृषि, तकनीक और युवाओं की भूमिका समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। देश को बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और नई संभावनाओं के द्वार खोलते हैं। उन्होंने कहा कि आज हर दिल वंदे मातरम् की धुन पर धड़क रहा है और हर घर तथा हर मन तिरंगे के रंग में रंगा हुआ है। देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समय हमारा है और संकल्प भी हमारा होना चाहिए। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और देश के संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए। उन्होंने कहा कि संकल्प दृढ़ होने पर कठिनाइयों और आपदाओं के बीच से रास्ता निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है। कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, जब वह अपने सपनों, संकल्पों और सामर्थ्य के दम पर लगातार आगे बढ़ता है।
प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों की ताकत और संकल्प से प्रेरित सपना है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय करता है तो इससे दुनिया में भारत को देखने का नजरिया भी बदलता है। उन्होंने कहा कि सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगला एक चौथाई भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश रुक नहीं सकता और उसकी गति भी नहीं रुकनी चाहिए। दिशा तय हो चुकी है और लक्ष्य हासिल करना ही होगा। इसके लिए वर्क कल्चर, सोच और काम करने की गति में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच-सात दशकों में जो काम नहीं हो पाए, उन्हें आने वाले पांच-सात वर्षों में पूरा करने का प्रयास होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश की युवा शक्ति, माताओं-बहनों, किसानों और मजदूरों पर भरोसा जताते हुए कहा कि मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार किया जा सकता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में भारत को कई संकटों का सामना करना पड़ा। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और इसके बाद यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन संकटों के बीच भारत ने अपनी तैयारियों और योजनाओं के दम पर चुनौतियों का सामना किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को देश को डराने और भयभीत रखने में आनंद आता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की अफवाहों के जरिए भारतीयों को चिंता में डालने की कोशिश की गई, लेकिन पिछले वर्षों में बनाई गई योजनाओं और तैयारियों का लाभ संकट के समय मिला। उन्होंने कहा कि देश ने मुश्किल परिस्थितियों में भी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। देश को अपनी क्षमताएं मजबूत करनी होंगी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करनी है।
प्रधानमंत्री के अनुसार पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना, आधुनिक रेलवे कोच का उत्पादन 21 गुना और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या चार गुना बढ़ी है। उन्होंने डिजिटल लेनदेन में भी कई गुना वृद्धि का उल्लेख किया और इसे देश में बदलती तकनीकी क्षमता का उदाहरण बताया।
ऊर्जा सुरक्षा को प्रधानमंत्री ने भविष्य की बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए समय की मांग है। उन्होंने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ने और ऊर्जा के सही इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र में ऊर्जा और खनिज संसाधनों की खोज को लेकर भी अपनी सरकार की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समुद्र के बड़े हिस्से को अन्वेषण के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया, लेकिन अब ऐसी सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने समुद्र के भीतर नए भंडार खोजने और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में पेट्रोल, डीजल, खाद और दवाइयों समेत विभिन्न संसाधनों का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के लिए किया जा रहा है। ऐसे समय में आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि पिछले वर्षों में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास नहीं किए गए होते तो मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना करना और कठिन होता।
प्रधानमंत्री ने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले पांच-सात वर्षों में देश को नई ऊंचाई और गति देने के लिए सात प्रमुख शक्तियों पर ध्यान देना होगा। इनमें मैन्युफैक्चरिंग पावर, कृषि और खाद्य उत्पादन, प्रौद्योगिकी और नवाचार, गति शक्ति, रक्षा बल, ग्रीन और ब्लू इकॉनमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की ताकत के साथ युवा शक्ति को जोड़कर राष्ट्र निर्माण को नई गति दी जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने पाइप से गैस पहुंचाने के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश के करीब 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी, जिसे पिछले 12 वर्षों में करीब 700 शहरों तक पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि पहले जहां लगभग 20-22 लाख घरों तक पाइप से गैस पहुंचती थी, वहीं अब करीब 1.75 करोड़ घरों तक यह सुविधा पहुंच चुकी है।
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की प्रगति को भी प्रधानमंत्री ने प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में चिप का महत्व बेहद बढ़ गया है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए सेमीकंडक्टर आवश्यक हैं। भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में अपने सेमीकंडक्टर प्लांट लगाए हैं और तीन प्लांट शुरू हो चुके हैं। आने वाले वर्षों में और प्लांट शुरू करने की योजना पर भी उन्होंने बात रखी।
प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों और ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में दुनिया की बड़ी कंपनियों की सूची में भारत की अधिक कंपनियां होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय बैंक, फार्मा कंपनियों और अन्य ब्रांड को वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के ब्रांड उसकी पहचान बनने चाहिए और दुनिया के लिए भारत एक आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में उभरना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से सुधारों की गति बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बीते समय के नियमों के आधार पर भविष्य की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए आने वाले समय की जरूरतों के अनुसार नीतियां और नियम बनाने होंगे।
गरीबी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि देशवासियों के प्रयासों और समर्पण से भारत ने विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि कभी भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब देश दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने सरकार की विभिन्न योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नल से जल कनेक्शन, गैस कनेक्शन, गरीबों के लिए शौचालय और आवास निर्माण की गति में तेजी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि शासन व्यवस्था में बदलाव करते हुए बड़ी संख्या में पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने देश में मेट्रो नेटवर्क के बढ़ते विस्तार की बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी और विस्तार देखने को मिला है। उनके मुताबिक ये उपलब्धियां 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की क्षमता को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि देश आज उन महान सपूतों का पुण्य स्मरण कर रहा है जिन्होंने आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने महात्मा गांधी समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों और महान क्रांतिकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि लाल किले पर पहली बार 15 अगस्त के अवसर पर वंदे मातरम् की गूंज सुनाई दे रही है और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक को लागू कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों से भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना देश के विकास और राजनीतिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन पर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है और मुश्किल समय में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश की विकास यात्रा को आत्मनिर्भरता, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, उत्पादन, कृषि, रक्षा और युवा शक्ति से जोड़ते हुए 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि भारत के पास सामर्थ्य है, संसाधन हैं और युवा शक्ति है। जरूरत बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ लगातार आगे बढ़ने की है।


