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Himachal MSP Hike: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, गेहूं-मक्की समेत कई फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी

Himachal MSP Hike: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, गेहूं-मक्की समेत कई फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस फैसले से राज्य के हजारों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के तहत प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों—गेहूं, मक्की, जौ, हल्दी और अदरक—के एमएसपी में बढ़ोतरी की गई है। गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है, जबकि मक्की का एमएसपी 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसी तरह, चंबा जिले की पांगी घाटी में उत्पादित जौ का एमएसपी 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है।

कच्ची हल्दी के समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी करते हुए इसे 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। वहीं, प्राकृतिक रूप से उगाई गई अदरक को सरकार 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदेगी। इस कदम को किसानों की आय बढ़ाने और रसायन-मुक्त खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

यह पूरी पहल राजीव गांधी प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत सरकार ने इस वर्ष लगभग 2,000 किसानों से 400 मीट्रिक टन गेहूं, 250 मीट्रिक टन मक्की, 150 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी और 30 मीट्रिक टन जौ की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। अदरक की खरीद के लिए भी आकलन किया जा रहा है। इस योजना के लिए करीब 6.95 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने कहा कि राज्य सरकार रसायन-मुक्त और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 तक एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रदेश में टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में दो लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख किसानों को प्रमाणित किया जा चुका है। राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में भी कृषि क्षेत्र का लगभग 14.70 प्रतिशत योगदान है।

सरकार का मानना है कि किसान-केंद्रित नीतियां और इस तरह की प्रगतिशील पहलें न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी और सतत विकास को नई दिशा देंगी।

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