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Himachal green energy: हिमाचल हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा, जलविद्युत और सौर परियोजनाओं से बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर राज्य

Himachal green energy: हिमाचल हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा, जलविद्युत और सौर परियोजनाओं से बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर राज्य

हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करेगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभरेगा।

प्रदेश में हर साल लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती है और सरकार का लक्ष्य है कि निकट भविष्य में इसका 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त किया जाए। इस दिशा में छोटी पनबिजली परियोजनाओं, सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार ने पांच मेगावाट तक की छोटी जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। पिछले तीन वर्षों में 17.25 मेगावाट क्षमता की सात परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जबकि 23.80 मेगावाट क्षमता की 12 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा 47.90 मेगावाट क्षमता की 18 परियोजनाएं स्वीकृति के लिए भेजी गई हैं और 12.65 मेगावाट की पांच परियोजनाओं को तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है।

ऊर्जा विभाग ने 25.7 मेगावाट क्षमता की सात परियोजनाओं के विस्तार के लिए समझौते किए हैं और 75 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिए 76 आवेदन प्रक्रिया में हैं।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी हिमाचल तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने 501 मेगावाट क्षमता के पांच सोलर पार्क और 212 मेगावाट की सौर परियोजनाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। कांगड़ा जिले के डमटाल में 200 मेगावाट का बड़ा सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा पेखूबेला, भंजाल और अघलौर जैसी सौर परियोजनाएं रिकॉर्ड समय में पूरी की गई हैं। हिम ऊर्जा द्वारा 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम को आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट की परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।

सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ नीति अपनाई है। इसके तहत 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की सौर परियोजनाएं निवेशकों को दी जा रही हैं। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 403.09 मेगावाट के लिए विद्युत खरीद समझौते भी हो चुके हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन पंचायत कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत हर पंचायत में 500 किलोवाट की सौर परियोजनाएं लगाई जाएंगी, जिससे होने वाली आय का 20 प्रतिशत हिस्सा अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण में खर्च किया जाएगा।

जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए चंबा की पांगी घाटी और लाहौल-स्पीति के दूरदराज गांवों में बैटरी स्टोरेज और ऑफ-ग्रिड सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। काजा में दो मेगावाट का सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस और भूतापीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा रही है। चंबा में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी स्टेशन और नालागढ़ में एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। वहीं हमीरपुर के नेरी में देश का पहला राज्य समर्थित बायोचार प्लांट लगाने की पहल भी की गई है।

इस तरह हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नया उदाहरण पेश कर रहा है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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