Tender Scam: ग्रेटर नोएडा उद्यान विभाग की निविदा में हेराफेरी का आरोप, सीईओ ने टेंडर किया निरस्त
नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग की एक निविदा प्रक्रिया में कथित हेराफेरी कर पसंदीदा ठेकेदार की फर्म को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद प्राधिकरण ने निविदा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही एक महीने के दौरान आवंटित अन्य कार्यों की भी जांच कराने की बात कही गई है।
मामला नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर जीरो प्वाइंट से परी चौक तक सेंट्रल वर्ज, सड़क किनारे की पटरी और आसपास स्थित दो पार्कों के रखरखाव तथा हरियाली बढ़ाने से जुड़ा है। इन कार्यों के लिए प्राधिकरण की ओर से जुलाई में करीब 1.65 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई थी।
बताया गया कि निविदा प्रक्रिया में कुल छह कंपनियों ने हिस्सा लिया था। तकनीकी जांच के बाद तीन कंपनियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। आरोप है कि योग्य घोषित की गई तीन फर्मों में से दो ने कथित तौर पर एक-दूसरे के समर्थन में निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इसको लेकर निविदा में शामिल ठेकेदार देवेंद्र पाल सिंह ने शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की कि निविदाओं की तकनीकी जांच उद्यान विभाग से हटाकर किसी स्वतंत्र या उच्चस्तरीय कमेटी से कराई जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उद्यान विभाग के उपनिदेशक की ओर से अपने पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। आरोप लगाया गया कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई।
इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखित शिकायत भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई।
मामला प्राधिकरण के संज्ञान में आने के बाद निविदा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। अब संबंधित कार्य के लिए दोबारा निविदा जारी की जाएगी। प्राधिकरण की ओर से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने की बात कही गई है।
ग्रेटर नोएडा के सीईओ रवि कुमार एनजी ने कहा कि निविदा निरस्त कर दी गई है और इस काम के लिए दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश भी दिए हैं।
