Digital Justice: ई-फाइलिंग से बदली अदालतों की तस्वीर, 1.25 करोड़ से अधिक मुकदमे ऑनलाइन दाखिल
Digital Justice: ई-फाइलिंग से बदली अदालतों की तस्वीर, 1.25 करोड़ से अधिक मुकदमे ऑनलाइन दाखिल
नई दिल्ली, 31 जुलाई : देश की न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। अदालतों में मुकदमा दायर करने के लिए लंबी कतारों और कागजी औपचारिकताओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में ई-फाइलिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
केंद्र सरकार की ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तहत 30 जून 2026 तक देशभर में ई-फाइलिंग प्रणाली के माध्यम से 1.25 करोड़ से अधिक मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग हो चुकी है। कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में यह जानकारी दी।
ई-फाइलिंग व्यवस्था फिलहाल 25 उच्च न्यायालयों और उनके अधीनस्थ जिला न्यायालयों में लागू है। इसके माध्यम से वकीलों और पक्षकारों को अदालत में भौतिक रूप से उपस्थित होकर दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम हुई है। डिजिटल व्यवस्था ने मुकदमों से संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित करने में भी मदद की है।
ई-फाइलिंग के साथ-साथ न्यायपालिका में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल कोर्ट, डिजिटल केस रिकॉर्ड, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, ई-सेवा केंद्र और मोबाइल एप जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इन डिजिटल सेवाओं का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
उत्तराखंड में भी डिजिटल न्याय व्यवस्था को तेजी से अपनाया जा रहा है। राज्य में अब तक जिला अदालतों में 1.17 लाख से अधिक और उच्च न्यायालय में 356 मामले ऑनलाइन दाखिल किए जा चुके हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि डिजिटल माध्यम से न्यायिक सेवाओं तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सरकार की ओर से वकीलों और आम नागरिकों को ई-कोर्ट्स की सुविधाओं से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, वीडियो ट्यूटोरियल और ई-सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी जानकारी की कमी के कारण कोई व्यक्ति डिजिटल न्याय व्यवस्था से वंचित न रहे।
ई-फाइलिंग और अन्य डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से आने वाले समय में अदालतों की कार्यप्रणाली में और बदलाव आने की उम्मीद है। कागजी प्रक्रिया को कम करने के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सेवाएं न्याय व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।




