Duleep Trophy Final: खिताब के बेहद करीब ईस्ट जोन, 584 रन की विशाल बढ़त; साउथ जोन को आखिरी दिन चमत्कार की जरूरत
नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे खिताबी मुकाबले के चौथे दिन ईस्ट जोन ने साउथ जोन पर अपना शिकंजा और कस दिया। कप्तान ईशान किशन की एक और प्रभावशाली पारी और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत ईस्ट जोन ने चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक कुल 584 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली। अब पांचवें और आखिरी दिन साउथ जोन के सामने मैच बचाने के लिए बेहद कठिन चुनौती है, जबकि ईस्ट जोन 14 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब जीतने की दहलीज पर खड़ा है।
ईस्ट जोन ने इस मुकाबले में शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। पहली पारी में टीम ने 708 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। कप्तान ईशान किशन इस पारी के सबसे बड़े सितारे रहे। उन्होंने 334 गेंदों का सामना करते हुए 270 रनों की शानदार पारी खेली। वह तिहरे शतक से जरूर चूक गए, लेकिन उनकी इस पारी ने साउथ जोन के सामने रनों का ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया, जिससे वापसी करना बेहद मुश्किल हो गया। कुमार कुशाग्र ने भी शतक लगाकर ईस्ट जोन को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
708 रनों के जवाब में साउथ जोन के बल्लेबाजों के सामने पहली पारी में बड़ी चुनौती थी। चौथे दिन की शुरुआत साउथ जोन ने छह विकेट पर 242 रन से की। टीम के कप्तान तिलक वर्मा क्रीज पर मौजूद थे और उनके साथ चामा मिलिंद ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने सातवें विकेट के लिए 78 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को 300 रन के पार पहुंचाया।
चामा मिलिंद ने मुश्किल परिस्थितियों में 43 रनों की उपयोगी पारी खेली। हालांकि उनके आउट होने के बाद साउथ जोन के निचले क्रम पर दबाव बढ़ गया और विकेट गिरने लगे। दूसरी तरफ कप्तान तिलक वर्मा एक छोर पर टिके रहे और ईस्ट जोन के गेंदबाजों का मुकाबला करते हुए अपनी टीम को संभालने की कोशिश करते रहे।
तिलक वर्मा ने बेहद धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और 211 गेंदों में 99 रन बनाए। उनकी पारी में नौ चौके शामिल रहे। वह अपने शतक से केवल एक रन दूर थे, लेकिन कोनैन कुरैशी की गेंद पर कॉट एंड बोल्ड हो गए। तिलक के आउट होने के साथ ही साउथ जोन की पहली पारी 336 रनों पर समाप्त हो गई। इस तरह ईस्ट जोन को पहली पारी के आधार पर 372 रनों की बड़ी बढ़त हासिल हुई।
तिलक वर्मा के अलावा देवदत्त पडिक्कल ने साउथ जोन के लिए 62 रन बनाए, जबकि चामा मिलिंद ने 43 रनों का योगदान दिया। हालांकि टीम के बाकी बल्लेबाज ईस्ट जोन के गेंदबाजी आक्रमण के सामने बड़ी पारी नहीं खेल सके और पहली पारी में ईस्ट जोन के 708 रनों के मुकाबले टीम काफी पीछे रह गई।
ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने विशाल स्कोर का पूरा फायदा उठाया। मुकेश कुमार टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 19 ओवर में 62 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने भी प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 16 ओवर में 42 रन देकर दो बल्लेबाजों को आउट किया। शिखर मोहन और कोनैन कुरैशी को भी दो-दो सफलताएं मिलीं।
पहली पारी में 372 रनों की विशाल बढ़त हासिल करने के बावजूद ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने साउथ जोन को फॉलोऑन नहीं दिया। उन्होंने दूसरी पारी में खुद बल्लेबाजी करने का फैसला किया, ताकि बढ़त को इतना बड़ा बनाया जा सके कि आखिरी दिन साउथ जोन के लिए मुकाबले में वापसी की संभावना बेहद कम हो जाए।
हालांकि दूसरी पारी में ईस्ट जोन की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टीम ने केवल 13 रन के स्कोर तक अपने दो शुरुआती विकेट गंवा दिए। इससे कुछ समय के लिए साउथ जोन के गेंदबाजों को वापसी की उम्मीद दिखाई दी, लेकिन कप्तान ईशान किशन ने एक बार फिर जिम्मेदारी संभाली और तेजी से रन बनाकर दबाव को पूरी तरह विपक्षी टीम की ओर मोड़ दिया।
ईशान किशन ने दूसरी पारी में 98 गेंदों पर 80 रन बनाए। उनकी पारी ने ईस्ट जोन की बढ़त को तेजी से विशाल बनाने में अहम भूमिका निभाई। पहली पारी में 270 रन बनाने के बाद दूसरी पारी में भी 80 रन की पारी खेलकर ईशान ने फाइनल मुकाबले में अपनी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ईशान की बल्लेबाजी के बाद ईस्ट जोन ने चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक पांच विकेट के नुकसान पर 212 रन बना लिए। पहली पारी की 372 रनों की बढ़त जोड़ने पर टीम की कुल बढ़त 584 रन तक पहुंच गई। इस विशाल अंतर ने साउथ जोन के सामने आखिरी दिन की चुनौती बेहद मुश्किल बना दी है।
मैच की स्थिति को देखते हुए ईस्ट जोन पांचवें दिन अपनी बढ़त को और बड़ा करने के बाद साउथ जोन को लक्ष्य दे सकता है। साउथ जोन के लिए न केवल विशाल लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल होगा, बल्कि आखिरी दिन ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने अपने विकेट बचाकर मैच ड्रॉ कराने की चुनौती भी आसान नहीं रहने वाली।
ईस्ट जोन के लिए यह फाइनल इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि टीम लंबे समय बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम करने के करीब पहुंची है। टीम के बल्लेबाजों ने पहली पारी में 700 से अधिक रन बनाकर मैच की नींव मजबूत की और इसके बाद गेंदबाजों ने साउथ जोन को 336 रन पर समेटकर बढ़त को निर्णायक स्थिति में पहुंचा दिया।
फाइनल में ईशान किशन का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। पहली पारी में 270 रन की विशाल पारी के दौरान उनके पास दलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल होने का मौका था। टूर्नामेंट के इतिहास में रमन लांबा और गगन खोड़ा ही तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज रहे हैं, लेकिन ईशान 270 रन पर आउट होकर इस उपलब्धि से चूक गए।
ईस्ट जोन का पहली पारी में बनाया गया 708 रन का स्कोर भी दलीप ट्रॉफी फाइनल के बड़े स्कोरों में शामिल हो गया। हालांकि फाइनल का सर्वाधिक टीम स्कोर अब भी नॉर्थ जोन के नाम है, जिसने 1987 में वेस्ट जोन के खिलाफ 868 रन बनाए थे।
दूसरी तरफ साउथ जोन के लिए तिलक वर्मा की 99 रनों की पारी संघर्ष का सबसे बड़ा उदाहरण रही। उन्होंने एक छोर संभालकर टीम को बड़ी मुश्किल से निकालने की कोशिश की, लेकिन शतक पूरा करने से ठीक पहले उनका विकेट गिर गया। उनके आउट होते ही साउथ जोन की पहली पारी भी समाप्त हो गई और ईस्ट जोन को 372 रनों की बड़ी बढ़त मिल गई।
अब मुकाबले का पांचवां और अंतिम दिन निर्णायक होगा। ईस्ट जोन के पास 584 रनों की बढ़त और मैच पर मजबूत नियंत्रण है। साउथ जोन को यहां से मुकाबला बचाने के लिए असाधारण प्रदर्शन करना होगा। वहीं ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की टीम की नजर आखिरी दिन बाकी काम पूरा करके 14 साल बाद दलीप ट्रॉफी की चैंपियन बनने पर होगी।


