Political Row: ‘दिमागी नक्सल कहलाने पर खुशी और गर्व’, पीएम मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले तंज पर चिदंबरम का पलटवार
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पलटवार किया है। चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहलाने पर खुशी और गर्व है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि वह खुश हैं कि उन्हें ‘बेवकूफ नक्सल’ नहीं कहा गया।
चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों में इस्तेमाल होने वाले नए नारों और अभिव्यक्तियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार नए शब्द गढ़ते हैं और पिछले करीब 12 वर्षों में कई राजनीतिक नारे तथा अभिव्यक्तियां सामने आई हैं।
कांग्रेस नेता ने ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का उदाहरण देते हुए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ को भी इसी कड़ी में रखा। उनका कहना था कि ऐसे शब्दों का कोई ठोस अर्थ नहीं है और भविष्य में भी कोई नया शब्द सामने आ सकता है।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर इन शब्दों को लेकर बन रहे मीम्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि खासकर Gen Z के सोशल मीडिया यूजर्स ‘नाराज फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसी अभिव्यक्तियों को लेकर बड़ी संख्या में मीम बना रहे हैं।
इस विवाद का एक संदर्भ प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से जुड़ा है। लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने वैचारिक स्तर पर नक्सली सोच रखने वालों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर दिया था।
प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि हथियारबंद नक्सली हिंसा के खिलाफ सरकार की कार्रवाई के कारण बड़ी सफलता मिली है, लेकिन वैचारिक स्तर पर ऐसी मानसिकता की चुनौती अभी मौजूद है। उन्होंने युवाओं को ऐसी विचारधारा से प्रभावित होने से बचाने की आवश्यकता बताई थी।
चिदंबरम ने इसके जवाब में सोशल मीडिया पर खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहलाने पर गर्व होने की बात कही थी और अब एक बार फिर उन्होंने अपने रुख को दोहराया है।
दूसरी तरफ ‘नाराज फूफा’ शब्द प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी परियोजनाओं और विकास कार्यों की आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए इस्तेमाल किया। वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने Dedicated Freight Corridor की उपलब्धियों का उदाहरण दिया।
प्रधानमंत्री ने डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन का उल्लेख करते हुए बताया कि एक ट्रेन में जितना सामान पहुंचाया जा सकता है, उसके लिए सड़क मार्ग से बड़ी संख्या में ट्रकों की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ आलोचक उपलब्धि देखने के बजाय यह पूछेंगे कि ट्रक चालकों का क्या होगा। ऐसे आलोचकों के लिए उन्होंने ‘नाराज फूफा’ की उपमा इस्तेमाल की।
चिदंबरम ने SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर कई दावे किए। उन्होंने कहा कि मताधिकार किसी नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार है और योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटने की स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। हालांकि ये आंकड़े और उनसे निकाले गए निष्कर्ष चिदंबरम की ओर से किए गए दावे हैं।
‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब भाजपा और कांग्रेस के बीच नए विवाद का हिस्सा बन गई है। प्रधानमंत्री इन अभिव्यक्तियों के जरिए आलोचकों और वैचारिक विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं, जबकि चिदंबरम ने उन्हीं शब्दों को लेकर व्यंग्यात्मक तरीके से जवाब दिया है।


