Labour Cess Notice: नोएडा सेक्टर-105 में लेबर सेस नोटिसों के खिलाफ RWA का कड़ा रुख, डीएम मेधा रूपम से हस्तक्षेप की मांग
रिपोर्ट। अजीत कुमार
नोएडा। सेक्टर-105 के निवासियों को निर्माण उपकर यानी लेबर सेस से जुड़े भारी-भरकम नोटिस भेजे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नोटिसों को अव्यावहारिक और अनुचित बताते हुए सेक्टर की आरडब्ल्यूए ने कड़ा विरोध जताया है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करने, नोटिसों पर तत्काल रोक लगाने और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कराने की मांग की है।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि उपकर निर्धारण अधिकारी एवं उप श्रमायुक्त कार्यालय, सेक्टर-3 नोएडा की ओर से वर्ष 2017-18 के कथित जीआईएस सर्वे को आधार बनाकर कई मकानों की निर्माण लागत निर्धारित की गई है। आरोप है कि वास्तविक निर्माण लागत और मौके पर भौतिक सत्यापन किए बिना ही वर्षों पुराने मकानों के मालिकों को लेबर सेस के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय के मुताबिक नोटिसों में निर्धारित उपकर के साथ 2 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज और 100 प्रतिशत तक पेनल्टी की चेतावनी भी दी जा रही है। उनका कहना है कि इससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त निवासियों पर अचानक बड़ा आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
आरडब्ल्यूए ने जिलाधिकारी को सौंपे पत्र में कुछ मामलों का उल्लेख भी किया है। संगठन के अनुसार सेक्टर-105 के बी-235 निवासी कमलेश गुप्ता को पत्रांक 12065/26 के तहत मकान की निर्माण लागत 94.50 लाख रुपये मानते हुए 94,500.03 रुपये का नोटिस जारी किया गया है। इसी तरह बी-270 निवासी जमील अहमद को 86,351 रुपये और बी-229 निवासी जय चंद एस. को 11,886 रुपये का नोटिस दिए जाने का दावा किया गया है।

आरडब्ल्यूए का आरोप है कि सात से दस वर्ष पहले बन चुके मकानों के संबंध में अब इस तरह से उपकर की मांग करना उचित नहीं है। दिव्य कृष्णात्रेय ने अपने पत्र में तीन वर्ष की कानूनी समयसीमा का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि इतने लंबे समय बाद ब्याज और पेनल्टी सहित वसूली की प्रक्रिया की वैधानिकता की समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि नोएडा प्राधिकरण के नियमों और संबंधित लीज डीड में अलग से इस प्रकार के सेस का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। आरडब्ल्यूए का तर्क है कि यदि किसी भवन पर निर्माण उपकर देय था तो उसका निर्धारण निर्माण के समय अथवा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया के दौरान किया जाना चाहिए था।
आरडब्ल्यूए ने मांग की है कि केवल पुराने जीआईएस सर्वे या अनुमानित निर्माण लागत के आधार पर उपकर तय करने के बजाय प्रत्येक मामले का पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन कराया जाए। वास्तविक निर्माण, निर्माण की अवधि और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी तरह की देयता तय की जाए।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने जिलाधिकारी से सेक्टर-105 के निवासियों को जारी किए गए विवादित नोटिसों की समीक्षा होने तक वसूली प्रक्रिया रोकने की मांग की है। इसके साथ ही जिन नोटिसों को नियमों के विपरीत पाया जाए, उन्हें निरस्त करने और उपकर निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि इन नोटिसों के कारण कई निवासियों में मानसिक और आर्थिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप करेगा और तथ्यों तथा नियमों की जांच के बाद निवासियों को उचित राहत प्रदान करेगा।
आरडब्ल्यूए ने कहा है कि सेक्टर के निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन इस मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी अपनी बात रखेगा।

