Falaida Gaushala: फलैदा गौशाला में रोपे गए 5000 पौधे, 600 निराश्रित गोवंश के लिए व्यवस्था; CCTV से होगी निगरानी

Falaida Gaushala: फलैदा गौशाला में रोपे गए 5000 पौधे, 600 निराश्रित गोवंश के लिए व्यवस्था; CCTV से होगी निगरानी

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की फलैदा गौशाला को पर्यावरण अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं। गौशाला परिसर में करीब 5000 पौधे लगाए गए हैं और लगभग दो एकड़ क्षेत्र में लॉन विकसित किया गया है। यहां करीब 600 निराश्रित गोवंश के रहने की व्यवस्था भी की गई है। बुधवार को यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने गौशाला के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया और परिसर में पौधरोपण किया।

निरीक्षण के दौरान सीईओ ने गौशाला में गोवंश के रखरखाव, हरियाली, जल संरक्षण और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गौशाला में विकसित की गई व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से बनाए रखने और गोवंश की देखभाल पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

यीडा के अनुसार फलैदा गौशाला में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से करीब पांच हजार पौधे रोपे गए हैं। पौधों के विकसित होने के बाद गौशाला परिसर में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा गौशाला के लगभग दो एकड़ क्षेत्र में लॉन विकसित किया गया है। परिसर को व्यवस्थित और हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण और लैंडस्केपिंग से संबंधित कार्य किए गए हैं।

गौशाला में करीब 600 निराश्रित गोवंश को रखने की व्यवस्था तैयार की गई है। गोवंश की सुरक्षा और नियमित निगरानी के लिए परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी योजना है। इससे गौशाला की गतिविधियों और पशुओं की स्थिति पर निगरानी रखी जा सकेगी।

प्राधिकरण ने फलैदा गौशाला को केवल गोवंश आश्रय स्थल तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। गौशाला से निकलने वाले गोबर, खाद और गौमूत्र के उपयोग के लिए आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए हैं।

इन उपकरणों की मदद से गोबर, खाद और गौमूत्र का उपयोग कर अगरबत्ती और धूपबत्ती जैसे उत्पाद तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इससे गौशाला में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गौशाला परिसर के बीच में एक तालाब का निर्माण भी कराया गया है। इस तालाब का इस्तेमाल वर्षा जल संचयन के लिए किया जाएगा। बारिश के पानी को संरक्षित कर परिसर में आवश्यकता के अनुसार उसके उपयोग की व्यवस्था विकसित की गई है।

प्राधिकरण के अनुसार हरियाली, वर्षा जल संचयन और गोवंश से प्राप्त संसाधनों के उपयोग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए गौशाला को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

सीईओ राकेश कुमार सिंह ने नवीनीकरण से जुड़े विभिन्न कार्यों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि गौशाला में साफ-सफाई, हरियाली और गोवंश की देखभाल से संबंधित व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखा जाए।

निरीक्षण के बाद सीईओ ने गौशाला परिसर में पौधरोपण भी किया। प्राधिकरण का कहना है कि फलैदा गौशाला में की गई नई व्यवस्थाओं से निराश्रित गोवंश की देखभाल के साथ पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर यीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीणा, राजेश कुमार और शैलेन्द्र कुमार भाटिया, विशेष कार्याधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह एवं महराम सिंह, महाप्रबंधक परियोजना राजेन्द्र भाटी और उप निदेशक उद्यान आनन्द मोहन सिंह सहित प्राधिकरण के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामवासियों ने भी भाग लिया।

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