Cyber Fraud: निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर सेवानिवृत्त अधिकारी से 22 लाख रुपये की साइबर ठगी

Cyber Fraud: निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर सेवानिवृत्त अधिकारी से 22 लाख रुपये की साइबर ठगी
नोएडा। साइबर अपराधियों ने निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर एक सेवानिवृत्त अधिकारी को लाखों रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। सेक्टर-76 निवासी 75 वर्षीय प्रभात कुमार सिन्हा से साइबर ठगों ने करीब 21.94 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार प्रभात कुमार सिन्हा पूर्व में छत्तीसगढ़ की एक स्टील कंपनी में कार्यरत थे और सेवानिवृत्ति के बाद नोएडा में रह रहे हैं। इसी वर्ष जनवरी माह में कुछ अज्ञात साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के माध्यम से उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को निवेश विशेषज्ञ बताते हुए कम समय में अधिक लाभ दिलाने का दावा किया और विभिन्न निवेश योजनाओं के जरिए उनका विश्वास जीत लिया।
ठगों ने आकर्षक रिटर्न और बड़े मुनाफे का लालच देकर उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया। सात जनवरी से 17 जनवरी के बीच कई किस्तों में रकम ट्रांसफर कराई गई। यह धनराशि आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक सहित अन्य बैंक खातों में भेजी गई। शुरुआत में साइबर ठगों ने निवेश पर बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाकर पीड़ित को विश्वास में लिया।
जब प्रभात कुमार सिन्हा ने निवेश की गई राशि और उसके लाभ को वापस लेने का प्रयास किया तो आरोपियों ने उनसे संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। जांच में सामने आया कि उनके खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से 19,412 रुपये, चार बार दो-दो लाख रुपये, 2.25 लाख रुपये, 3.50 लाख रुपये, 5 लाख रुपये और 3 लाख रुपये समेत कुल 21 लाख 94 हजार 412 रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ित ने बताया कि यह राशि उनकी जीवनभर की मेहनत की कमाई और सेवानिवृत्ति के बाद की बचत का बड़ा हिस्सा थी। ठगी का पता चलने पर उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस से की गई शिकायत में पीड़ित ने संबंधित बैंक खाताधारकों, मोबाइल नंबर उपयोगकर्ताओं और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने ठगी गई राशि की रिकवरी कराने का भी अनुरोध किया है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश संबंधी धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। शुरुआत में निवेशकों को मामूली लाभ दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद आरोपी संपर्क खत्म कर देते हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि असामान्य या अत्यधिक रिटर्न का दावा करने वाली योजनाओं से सावधान रहें। किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच सेबी और अन्य नियामक संस्थाओं की वेबसाइट पर अवश्य करें। अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए निवेश लिंक, मोबाइल ऐप या ऑनलाइन ग्रुप ज्वाइन करने से बचें। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार, बैंक या परिवार के सदस्यों से सलाह लेना जरूरी है।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति विशेष रूप से जागरूक रहने की आवश्यकता है। परिवार के सदस्यों को भी समय-समय पर उन्हें साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी देनी चाहिए, ताकि वे इस प्रकार के अपराधों से सुरक्षित रह सकें। किसी भी तरह की साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।





