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Cyber Crime नौकरी, निवेश और गेमिंग के नाम पर 43.50 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने 10.65 लाख रुपये फ्रीज कराए

Cyber Crime नौकरी, निवेश और गेमिंग के नाम पर 43.50 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने 10.65 लाख रुपये फ्रीज कराए

नोएडा। साइबर अपराधियों ने शेयर बाजार में निवेश, घर बैठे ऑनलाइन नौकरी और गेमिंग के जरिए रकम दोगुनी करने का झांसा देकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के तीन लोगों से कुल 43.50 लाख रुपये ठग लिए। ठगी का शिकार हुए तीनों लोगों ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों की जांच के दौरान साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में पहुंची 10.65 लाख रुपये की रकम फ्रीज करा दी है। अब पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सोशल मीडिया प्रोफाइल और डिजिटल ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर जालसाजों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

पुलिस के अनुसार तीनों मामलों में साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज किया गया है। इन मामलों में उपनिरीक्षक परीक्षा गोंदिया की ओर से शिकायतों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 17.76 लाख की ठगी

सेक्टर-122 निवासी नरेंद्र सिंह को पिछले वर्ष साइबर ठगों ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा था। ग्रुप में शुरुआत में शेयर बाजार से संबंधित टिप्स और निवेश से मुनाफा कमाने के तरीके बताए जाते थे। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने उन्हें एक निवेश संबंधी मोबाइल ऐप डाउनलोड कर उसमें रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा।

शुरुआत में ऐप पर मुनाफा दिखाकर नरेंद्र का भरोसा जीत लिया गया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में निवेश के नाम पर रकम जमा कराने के लिए कहा गया। मुनाफे के लालच में नरेंद्र ने कई महीनों के दौरान कुल 17.76 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

जब उन्होंने ऐप पर दिखाई जा रही मुनाफे की रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाने शुरू कर दिए। इसके बाद उन्हें धोखाधड़ी का शक हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 4.96 लाख रुपये आरोपियों के खातों में मौजूद थे, जिन्हें फ्रीज करा दिया गया।

घर बैठे नौकरी का झांसा देकर महिला से 14.54 लाख ठगे

दूसरे मामले में नोएडा निवासी डिम्पी बंसल को साइबर ठगों ने ऑनलाइन नौकरी के नाम पर निशाना बनाया। महिला के मुताबिक, अगस्त 2025 में एक व्यक्ति ने टेलीग्राम के जरिए उनसे संपर्क किया और घर बैठे अच्छी कमाई वाली ऑनलाइन नौकरी का प्रस्ताव दिया।

अगले दिन उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया। वहां शुरुआत में छोटे-छोटे टास्क पूरे कराए गए और इसके बदले कमाई का भरोसा दिलाया गया। बाद में ठगों ने प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अकाउंट अपग्रेड शुल्क के नाम पर लगातार पैसे जमा कराने शुरू कर दिए।

ऑनलाइन कमाई के झांसे में आकर महिला ने आरोपियों के बताए खातों में कुल 14.54 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्हें रकम वापस नहीं मिली तो आरोपियों ने संपर्क करना बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की। पुलिस ने जांच के दौरान 3.38 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं।

गेमिंग ऐप पर दोगुना मुनाफे का लालच देकर 11.20 लाख हड़पे

तीसरे मामले में ग्रेटर नोएडा की स्टेलर वन सोसाइटी निवासी शुभम गुप्ता साइबर ठगों के निशाने पर आए। शुभम ऑनलाइन गेम खेलते थे। उन्होंने गूगल पर एक गेमिंग एप्लिकेशन डाउनलोड किया था, जिसके विज्ञापन में गेम खेलकर रकम दोगुनी करने का दावा किया गया था।

शुरुआत में उन्होंने सामान्य तरीके से गेम खेला। इसके बाद ऐप में निवेश का विकल्प दिखाई देने लगा। अधिक मुनाफे के लालच में शुभम ने धीरे-धीरे ऐप के जरिए 11.20 लाख रुपये लगा दिए। जब उन्होंने अपनी कमाई की रकम निकालने की कोशिश की तो ऐप संचालकों ने जवाब देना बंद कर दिया।

ठगी का पता चलने के बाद शुभम ने पुलिस से शिकायत की। साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खातों में मौजूद 2.30 लाख रुपये फ्रीज करा दिए।

बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच तेज

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, तीनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस बैंक खातों की डिटेल, ट्रांजेक्शन ट्रेल, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और ठगी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर रही है। जिन खातों में पीड़ितों की रकम ट्रांसफर हुई, उनकी भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, फ्रीज कराई गई रकम को नियमानुसार पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। साथ ही पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन वारदातों के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग साइबर ठगों के नेटवर्क सक्रिय हैं।

सोशल मीडिया से शुरू होता है साइबर ठगी का जाल

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग अक्सर व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद शेयर ट्रेडिंग, पार्ट-टाइम नौकरी, ऑनलाइन टास्क या गेमिंग के जरिए कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच दिया जाता है।

ठग शुरुआत में पीड़ित को छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा जीतते हैं। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के बाद जब पीड़ित पैसा निकालने का प्रयास करता है तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी या तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। पीड़ित के और पैसे देने से इनकार करने या रकम खत्म होने के बाद ठग संपर्क बंद कर देते हैं।

पुलिस ने लोगों को किया सतर्क

पुलिस ने लोगों से व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर मिलने वाले निवेश और नौकरी के ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करने की अपील की है। निवेश के लिए केवल सेबी से पंजीकृत प्लेटफॉर्म और अधिकृत संस्थानों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। किसी भी गेमिंग या ट्रेडिंग ऐप में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता और वैधता की जांच करना जरूरी है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि अनजान बैंक खातों में रकम ट्रांसफर न करें और किसी व्यक्ति के साथ स्क्रीन शेयरिंग, ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने या ठगी का संदेह होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करने और साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

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