Mahant Mahendranath: बलरामपुर पहुंचे सीएम योगी, ब्रह्मलीन महंत महेंद्रनाथ की 25वीं पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि

Mahant Mahendranath: बलरामपुर पहुंचे सीएम योगी, ब्रह्मलीन महंत महेंद्रनाथ की 25वीं पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि
बलरामपुर में सोमवार का दिन भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देवीपाटन मंदिर पहुंचे। उन्होंने ब्रह्मलीन महंत महेंद्रनाथ की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग लिया और महान संत को नमन करते हुए उनके चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और महंत महेंद्रनाथ के तप और समाज सेवा के कार्यों को स्मरण किया।
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में जुटे रहे। पूरे परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पूरे बलरामपुर शहर में भक्तों में खासा उत्साह देखा गया। देवीपाटन मंदिर को फूलों, रोशनियों और रंगीन झालरों से सजाया गया था। दूर-दराज़ से श्रद्धालु महंत महेंद्रनाथ के दर्शन और पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। मंदिर के द्वार पर लगातार भक्तों की भीड़ उमड़ती रही, जबकि स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रात में देवीपाटन मंदिर परिसर में ही विश्राम करेंगे। मंगलवार सुबह वे आदिशक्तिपीठ में पूजन-अर्चन कर देवी दर्शन करेंगे और उसके बाद गौशाला पहुंचकर गायों को गुड़ और चारा खिलाएंगे। मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सनातन परंपराओं के संरक्षण और गौसेवा के प्रति उनके समर्पण को भी दर्शाता है।
देवीपाटन मंदिर, जो आदिशक्तिपीठों में से एक है, सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। महंत महेंद्रनाथ ने अपने जीवनकाल में समाज कल्याण, धार्मिक उत्थान और जनसेवा के लिए जो योगदान दिया, उसे श्रद्धालु आज भी स्मरण करते हैं। मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि महंत महेंद्रनाथ का जीवन त्याग, तपस्या और लोक कल्याण की भावना का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे ऐसे महान संतों के बताए मार्ग पर चलें और समाज में सद्भाव, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करें।





