Kanpur Massive Fire: कानपुर अग्निकांड से राख हुआ व्यापारिक इतिहास, पीढ़ियों की मेहनत पल में खाक
कानपुर की ऐतिहासिक कलक्टरगंज गल्ला मंडी दोपहर भीषण आग की चपेट में आकर एक त्रासदी में बदल गई। 159 साल पुरानी इस मंडी में लगी आग ने न केवल शहर की आर्थिक धड़कनों को सुन्न कर दिया, बल्कि पीढ़ियों की मेहनत, व्यापारिक विरासत और हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी को चंद घंटों में राख में तब्दील कर दिया। कलक्टरगंज थाना क्षेत्र स्थित इस मंडी में दोपहर बाद आग लगनी शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते सैकड़ों दुकानों और गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया। लपटें इतनी भयावह थीं कि 20 किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं। बाजार में मौजूद रुई, अनाज, प्लास्टिक और केमिकल से भरे ड्रमों ने आग को और विकराल बना दिया। अतिक्रमण ने दमकल की गाड़ियों को भीतर तक पहुंचने से रोका, जिससे हालात और बिगड़ गए।
मंडी परिसर में बैटरियों, सिलिंडरों और केमिकल के ड्रमों के फटने से लगातार 100 से अधिक धमाके हुए। आग की भीषणता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 70 से ज्यादा ई-रिक्शा, स्कूटी और मोटरसाइकिलें चपेट में आकर खाक हो गईं। एक सिलिंडर का टुकड़ा उछलकर दूर सड़क पर जा गिरा, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। पास ही स्थित सीपीसी गोदाम और ऑयल डिपो तक आग पहुंचने से पहले प्रशासन ने राहत की सांस ली। मंडी में रुई, बरदाना, अनाज, ट्रांसपोर्ट और किराना की एक हजार से ज्यादा टट्टर और टीनशेड से बनी दुकानें थीं। आग ने पूरे क्षेत्र को चपेट में ले लिया। जलती दुकानों से कई मीटर ऊंची लपटें उठ रही थीं। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मंडी के आसपास की 1500 से अधिक दुकानों और मकानों को खाली कराया।
व्यापारिक नुकसान की बात करें तो प्रारंभिक आंकलन के अनुसार, लगभग 60 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। रुई के कारोबारी अरविंद चतुर्वेदी ने दो करोड़ रुपये के निजी नुकसान की जानकारी दी। वहीं उमाशंकर मिश्रा एंड कंपनी के मालिक और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने मंडी के कुल नुकसान का आकलन 60 करोड़ रुपये बताया। यह हादसा सिर्फ एक अग्निकांड नहीं, बल्कि शहर के व्यापारिक इतिहास में दर्ज एक गहरा घाव बन गया है।
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