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ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित बुजुर्ग को एम्स में मिला पुनर्जीवन

-मरीज की हालत स्थिर, जल्द होगा अस्पताल से डिस्चार्ज

नई दिल्ली, 10 नवम्बर: ब्रेन स्ट्रोक का अटैक आते ही व्यक्ति को 03 से 24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने की सलाह पर अमल करने वाले परिवार के एक बुजुर्ग (66 वर्ष) सदस्य को हाल ही में एम्स दिल्ली के न्यूरो विज्ञान केंद्र ने पुनर्जीवन प्रदान करने में सफलता पाई है।

दरअसल, एक बुजुर्ग व्यक्ति को देर रात ब्रेन स्ट्रोक का अटैक आया था। परिजन उन्हें साथ लेकर तुरंत यानि रात 12 बजे एम्स पहुंचे। डॉक्टरों ने मरीज की सीटी ब्रेन- आरटी, सीटी एंजियोग्राम सहित सभी जरूरी जांच संपन्न करने के बाद उन्हें मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी देने का फैसला किया। मरीज का बायां हेमिप्लेजिया प्रभावित हुआ था। रात 2 बजे ही ‘स्टेंट रिट्रीवर’ तकनीक के उन्नत संस्करण से मरीज का इलाज किया और उसके मस्तिष्क की धमनी में बने खून के थक्कों या क्लॉट को हटाने में सफलता प्राप्त की। इस दौरान एसआर, न्यूरो एनेस्थीसिया टीम, तकनीशियन, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।

इस आपातकालीन प्रक्रिया को अंजाम देने वाले और मरीज को जीवनपर्यंत विकलांगता के खतरे से बाहर लाने वाले डॉ शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि स्ट्रोक, पक्षाघात या लकवा आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। लेकिन पीड़ित को उचित समय पर उपचार मिल जाए तो वह न सिर्फ दोबारा ठीक हो सकता है। बल्कि शारीरिक दिक्कतों से भी बच सकता है। उन्होंने बताया कि उक्त मरीज तीन घंटे के अंदर यानि गोल्डन पीरियड में ही ओटी टेबल पर पहुंचने में कामयाब रहा। जिससे उसका सफल उपचार हो सका। अब मरीज खतरे से बाहर है। उसकी हालत स्थिर है,जल्द ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

क्यों होता है स्ट्रोक ?
गायकवाड़ ने बताया कि स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है या बाधित हो जाता है। इससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते और कोशिकाएं मर जाती हैं। ये दो तरह के होते हैं। इस्केमिक स्ट्रोक और रक्तस्रावी स्ट्रोक। इस्केमिक, सबसे आम तरह का स्ट्रोक होता है। यह तब होता है जब मस्तिष्क की किसी प्रमुख रक्त वाहिका में रक्त का थक्का जम जाता है या प्लाक जमा हो जाता है। रक्तस्रावी स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और रक्त आस-पास के ऊतकों में फैल जाता है।

स्ट्रोक से बचने के उपाय
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करना
तंबाकू का सेवन सीमित करना
कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करना
स्वस्थ वजन बनाए रखना
मधुमेह को नियंत्रित करना
शराब का सेवन कम करना

बाएं तरफा हेमिप्लेजिया के लक्षण
हेमिप्लेजिया का मतलब है कि धड़ और आसन की मांसपेशियां प्रभावित होना। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें स्ट्रोक सबसे आम कारण है। स्ट्रोक इस्केमिक या रक्तस्रावी हो सकता है। हेमिप्लेजिया से पीड़ित व्यक्ति की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं जिनमें कपड़े पहनने, बोलने, चेहरे के भाव प्रकट करने, दांत ब्रश करने, नहाने और खाने पीने में मुश्किल होना प्रमुख है।

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