
Patna (मृत्युंजय) : बिहार की राजनीति में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम हुआ। राज्यपाल ने अधिसूचना जारी कर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है। इसके साथ ही उनके मंत्री पद को लेकर बनी संवैधानिक उलझन भी समाप्त हो गई है।
दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और भाजपा कोटे से बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मंत्री बनने के बावजूद वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया था कि बिना सदन का सदस्य बने कोई व्यक्ति मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। अब राज्यपाल के मनोनयन के बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने का मार्ग साफ हो गया है और वे अगले छह वर्ष तक विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।
यह मनोनयन ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश को नामित किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार की रणनीति और संगठनात्मक संतुलन दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचायती राज विभाग को बिहार में ग्रामीण विकास की रीढ़ माना जाता है। इस विभाग के मंत्री के रूप में दीपक प्रकाश पर पंचायतों को सशक्त बनाने, मनरेगा, आवास योजना और ग्रामीण सड़कों जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी है।
मनोनयन के बाद दीपक प्रकाश ने कहा कि वे राज्यपाल और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें विधान परिषद में जनता की आवाज बनने का अवसर मिला है और वे इसे मेहनत और समर्पण से सिद्ध करेंगे। बिहार के गांवों का विकास उनकी प्राथमिकता है और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करके ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर जो चर्चा चल रही थी वह अब समाप्त हो गई है। अब पूरा ध्यान बिहार के विकास और गरीब कल्याण पर होगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने, डिजिटल पंचायत और पारदर्शी शासन की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब अब काम से दिया जाएगा।
राज्यपाल के इस मनोनयन को भाजपा और एनडीए के भीतर संतुलित कदम माना जा रहा है। इससे सरकार को राहत मिली है और पंचायती राज विभाग की योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है। अब देखना होगा कि नए सदस्य के रूप में दीपक प्रकाश विधान परिषद में किस तरह भूमिका निभाते हैं और ग्रामीण बिहार के लिए क्या नई पहल करते हैं।





