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Beat The Heat अभियान से बच्चों को मिलेगी राहत, हीट वेव के बीच दिल्ली सरकार का बड़ा कदम

Beat The Heat अभियान से बच्चों को मिलेगी राहत, हीट वेव के बीच दिल्ली सरकार का बड़ा कदम

राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ती गर्मी और हीट वेव के खतरे के बीच बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ‘बीट द हीट’ अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों को लू और अत्यधिक तापमान के दुष्प्रभाव से बचाना है, ताकि गर्मी के इस मौसम में उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों सुरक्षित रह सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी का असर हर आयु वर्ग पर पड़ता है, लेकिन बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में वयस्कों जितना सक्षम नहीं होता और लंबे समय तक धूप में रहने के कारण वे जल्दी हीट स्ट्रोक की चपेट में आ सकते हैं। यही कारण है कि यह अभियान बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।

लोकनायक अस्पताल के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी में बच्चों में डिहाइड्रेशन, हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में चक्कर आना, तेज सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक थकान, शरीर का तापमान बढ़ना और गंभीर स्थिति में बेहोशी शामिल हैं। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों में ‘हाइड्रेशन बेल’ लागू की जा रही है, जिसके माध्यम से बच्चों को नियमित अंतराल पर ओआरएस दिया जाएगा। साथ ही स्कूल परिसरों में ‘कूल कॉर्नर’ बनाए जा रहे हैं, जहां बच्चे गर्मी से राहत पा सकें। सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ‘नो एम्प्टी बॉटल’ नियम लागू किया गया है, जिससे हर बच्चा पानी या अन्य पेय पदार्थ साथ रखे।

इसके अलावा नींबू पानी, छाछ जैसे पारंपरिक और प्राकृतिक पेयों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि बच्चों का शरीर हाइड्रेटेड बना रहे। ‘वन चाइल्ड-वन प्लांट’ और ‘जल मित्र’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित की जा रही है।

अभियान के तहत शिक्षकों को ‘हीट वॉच’ की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि वे बच्चों में हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत मदद उपलब्ध करा सकें। यह पहल न केवल बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी, बल्कि स्कूलों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।

 

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